18 साल बाद रायपुर पहुंचे मुनि आगम सागर, बोले- अनुशासन और ‘यस बॉस’ का भाव ही सफलता की कुंजी

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दिगंबर मुनि आगम सागर महाराज ससंघ का ‘नवोदय तीर्थ वर्षायोग 2026’ के लिए मालवीय रोड स्थित दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। सुबह निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। धर्म ध्वज, कलश यात्रा, जयघोष और रंगोलियों के बीच मुनि संघ का स्वागत किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ मंगल प्रवेश
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के मैनेजिंग ट्रस्टी एवं वर्षायोग 2026 के अध्यक्ष नरेंद्र जैन गुरु कृपा तथा कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन ने बताया कि मुनि आगम सागर महाराज, मुनि पुनीत सागर महाराज, मुनि धैर्य सागर महाराज और मुनि स्वागत सागर महाराज ससंघ की आगवानी के लिए समाज की ओर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
मुनि पुनीत सागर बोले- कलयुग में एकता ही सबसे बड़ा बल
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुनीत सागर महाराज ने कहा कि “कलऊ एकता बलम”, अर्थात कलयुग में एकता ही सबसे बड़ा बल है। उन्होंने समाज को संगठित रहने का संदेश देते हुए कहा कि बड़ा मंदिर समाज का प्रमुख स्तंभ है और सभी को मिलकर धर्म और संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए।
समय का सदुपयोग करने की दी सीख
मुनि पुनीत सागर ने कहा कि हर व्यक्ति के हाथ में घड़ी तो है, लेकिन वास्तव में हम समय के हाथ में हैं। इसलिए जीवन के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग आत्मकल्याण और धर्म साधना में करना चाहिए।
मुनि आगम सागर ने दिया अनुशासन का संदेश
मुनि आगम सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि परिवार में सुख और सफलता के लिए अनुशासन तथा बड़ों की आज्ञा का पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “यस बॉस” का भाव अपनाकर गुरुजनों और अभिभावकों की बात मानने वाला व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है। उन्होंने बताया कि स्वयं उन्होंने भी गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए जीवन में यह स्थान प्राप्त किया है।
धर्म से जुड़े रहने का किया आह्वान
मुनि आगम सागर महाराज ने पद्मपुराण का प्रसंग सुनाते हुए धर्म, संयम और आत्मकल्याण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रवचन केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए होते हैं। श्रद्धालुओं से वर्षायोग के दौरान नियमित रूप से धर्मसभा में उपस्थित होकर आत्मिक उन्नति का संकल्प लेने का आह्वान किया।



