बिलासपुर संभाग

17.24 करोड़ का ‘मौत का खेल’ ! डॉक्टर, वकील, बाबू सब सलाखों के पीछे… अब किस बड़े चेहरे पर गिरेगी कानून की गाज ?

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // बिलासपुर का बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाला अब केवल फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट या चार लाख रुपये के मुआवजे तक सीमित नहीं रह गया है। हर दिन हो रही गिरफ्तारियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि सरकारी तंत्र के भीतर बैठा एक संगठित नेटवर्क वर्षों तक सक्रिय रहा। डॉक्टर से शुरू हुई कार्रवाई अब एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय तक पहुंच चुकी है। डॉक्टर, अधिवक्ता, बाबू, बैंककर्मी, चालक और मृतकों के परिजन जेल पहुंच चुके हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बरकरार है—क्या जांच सिर्फ मोहरों तक सीमित रहेगी या करोड़ों रुपये के इस खेल के असली चेहरे भी कानून के शिकंजे में आएंगे?

डॉक्टर के बाद अब बाबुओं पर गिरी गाज

घोटाले की जांच कर रही सरकंडा पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एसडीएम कार्यालय के दो बाबू और तहसीलदार कार्यालय के एक बाबू को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

पुलिस जांच के अनुसार तीनों आरोपी वकीलों द्वारा प्रस्तुत किए गए मुआवजा प्रकरणों को अपनी शासकीय आईडी से ऑनलाइन प्रक्रिया में आगे बढ़ाते थे और दस्तावेजों को स्वीकृति के लिए अग्रेषित कर मुआवजा राशि पारित कराने में अहम भूमिका निभाते थे।

जेल भेजे गए तीनों बाबू

  • नरेंद्र कौशिक – बाबू, एसडीएम कार्यालय
  • गरीबराम बिनझवार – बाबू, एसडीएम कार्यालय
  • हरिशंकर राठौर – बाबू, तहसीलदार कार्यालय

गरीबराम बिनझवारबाबू, एसडीएम कार्यालय

नरेंद्र कौशिक – बाबू, एसडीएम कार्यालय

हरिशंकर राठौर – बाबू, तहसीलदार कार्यालय

डॉक्टर की गिरफ्तारी से खुली थीं परतें

इससे एक दिन पहले तोरवा पुलिस ने सिम्स की पूर्व चिकित्सक डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोप है कि उन्होंने कई मामलों में सामान्य मौत अथवा हृदयाघात को सर्पदंश से मृत्यु दर्शाते हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर शासन से चार-चार लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत कराया गया। पुलिस अब उनके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।

अब तक किन-किन पर कसा शिकंजा

जांच के दौरान अब तक कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है—

  • डॉ. प्रियंका सोनी – पूर्व चिकित्सक, सिम्स
  • हरीओम प्रसाद खांडेकर – अधिवक्ता
  • मंगला आकाश बिहारी – अधिवक्ता
  • महेंद्र कुमार अशोक – कथित अधिवक्ता
  • कुश कुमार गुप्ता – बैंककर्मी
  • गोविंद विश्वकर्मा – तहसीलदार कार्यालय से संबद्ध दैनिक वेतनभोगी चालक
  • नरेंद्र कौशिक – बाबू, एसडीएम कार्यालय
  • गरीबराम बिनझवार – बाबू, एसडीएम कार्यालय
  • हरिशंकर राठौर – बाबू, तहसीलदार कार्यालय
  • मृतकों के कुछ परिजन भी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

डॉ. प्रियंका सोनी – पूर्व चिकित्सक, सिम्स

जांच के घेरे में आठ से अधिक डॉक्टर

पुलिस सूत्रों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में सर्पदंश से जुड़े संदिग्ध मामलों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले आठ से अधिक डॉक्टर जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी रिपोर्ट व्यक्तिगत स्तर पर बनाई गईं या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा था।

ऐसे हुआ करोड़ों रुपये का खेल

विवेचना में सामने आया है कि कई मामलों में वास्तविक मौत का कारण हृदयाघात, आत्महत्या या अन्य कारण थे, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सर्पदंश से मृत्यु दर्शाई गई। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर राजस्व विभाग से प्रति प्रकरण चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत कराई गई। पुलिस को आशंका है कि इसी तरीके से सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये निकाले गए।

विधानसभा में उठा तो खुली 17.24 करोड़ की परत

पूरा मामला उस समय सुर्खियों में आया जब विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने वर्ष 2024 में बिलासपुर जिले में 431 सर्पदंश मौतों का आंकड़ा सामने रखा। वहीं सर्पदंश प्रभावित माने जाने वाले जशपुर जिले के कुनकुरी क्षेत्र में तीन वर्षों में केवल 96 मौतें दर्ज होने की जानकारी दी गई। इसके बाद बिलासपुर जिले में 17 करोड़ 24 लाख रुपये के मुआवजा वितरण की जांच शुरू हुई।

मर्ग रजिस्टर से बैंक खातों तक जांच

सिविल लाइन पुलिस ने सिम्स का मर्ग रजिस्टर जब्त कर वर्ष 2020 से 2025 तक दर्ज सभी संदिग्ध मामलों की जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। बैंक खातों में पहुंची राशि, दस्तावेजों का सत्यापन, लाभार्थियों और कथित बिचौलियों के बीच धन के लेन-देन की भी गहन पड़ताल की जा रही है।

कई विभाग जांच के दायरे में

अब तक की जांच में स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग, एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, बैंकिंग व्यवस्था और नगर निगम से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ चुकी है। पुलिस का दावा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्य मास्टरमाइंड अब भी फरार

पुलिस के अनुसार इस पूरे षड्यंत्र का कथित मुख्य मास्टरमाइंड अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार अभी भी फरार है। वहीं पहले गिरफ्तार किए जा चुके अधिवक्ता रंजीत कुमार चतुर्वेदी सहित अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है।

सबसे बड़ा सवाल…

लगातार बढ़ती गिरफ्तारियां यह संकेत दे रही हैं कि यह फर्जीवाड़ा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। डॉक्टर, अधिवक्ता, बाबू और बैंककर्मी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं, लेकिन पूरे शहर में अब एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या 17.24 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले के असली सूत्रधार भी बेनकाब होंगे, या जांच निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सिमट कर रह जाएगी?

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