35 लाख की किताबें गायब: सरकारी गोदाम से 450 बंडल लापता, गरीब बच्चों के हक पर किसने डाला डाका?

रीवा ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को निशुल्क वितरित की जाने वाली पाठ्य पुस्तकों में करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये के बड़े फर्जीवाड़े की आशंका ने प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया है। पाठ्य पुस्तक निगम के मुख्य गोदाम से 450 से अधिक बंडल किताबें रहस्यमयी तरीके से गायब होने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गायब पुस्तकों की कीमत करीब 35 लाख रुपये आंकी गई है। मामले के सामने आते ही रीवा से लेकर भोपाल तक हड़कंप मच गया है और उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है।
स्टॉक मिलान में खुला बड़ा खेल
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब गोदाम में रखी पुस्तकों का स्टॉक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाया। जांच में बड़ी संख्या में किताबों के बंडल गायब पाए गए। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए चोरहटा थाना में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
450 से ज्यादा बंडल कैसे हुए गायब?
गोदाम की सुरक्षा व्यवस्था के बीच इतनी बड़ी मात्रा में किताबों का गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस अब गोदाम के स्टॉक रजिस्टर, आवक-जावक के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी घटना किसी एक व्यक्ति के बूते की नहीं हो सकती।
भोपाल से पहुंची विशेष जांच टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल से वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष जांच टीम रीवा पहुंच गई है। टीम ने गोदाम में दस्तावेजों और स्टॉक का परीक्षण शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जांच के दौरान केवल किताबों की कमी ही नहीं, बल्कि अन्य वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत भी मिले हैं।
बड़े चेहरों पर भी पड़ सकती है आंच
जांच एजेंसियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, विभाग से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत मिलने पर कार्रवाई की बात कही जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल…
सरकारी स्कूलों के गरीब विद्यार्थियों के लिए भेजी गई लाखों रुपये की किताबें आखिर कहां गायब हो गईं? क्या यह केवल लापरवाही का मामला है या इसके पीछे कोई संगठित फर्जीवाड़ा? अब पूरे मामले में पुलिस और विशेष जांच दल की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।



