20 जुलाई महाकाल भस्म आरती : चंदन और आभूषणों से सजे बाबा महाकाल, भक्तों ने किए दिव्य दर्शन

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि, सोमवार तड़के भगवान महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट प्रातः 4 बजे खोले गए। इसके बाद विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान का मनमोहक और दिव्य श्रृंगार चंदन, आभूषणों तथा सुगंधित पुष्पों से किया गया।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद भगवान का भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से आकर्षक श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण की परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान कर कपूर आरती की गई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म रमाने के उपरांत भगवान महाकाल को रजत का शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला तथा विभिन्न पुष्पमालाएं अर्पित कर दिव्य अलंकरण किया गया।
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। सोमवार की भस्म आरती में देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं भी प्रकट कीं। इस दौरान पूरा महाकाल मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गुंजायमान रहा।



