बिलासपुर संभाग

एक्सपायरी सैनिटरी पैड बांटने और मुफ्त पैड बेचने के आरोप, एफआईआर की मांग पर अड़े विद्यार्थी

मुफ्त वितरण के लिए आए सैनिटरी पैड छात्राओं को बेचने और एक्सपायरी पैड बांटने के आरोपों को लेकर विद्यार्थियों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेजने की कार्रवाई के बावजूद मंगलवार को विद्यार्थियों ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और कथित रूप से जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे आपराधिक कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) //

2022 में एक्सपायर पैड बांटने का आरोप

मल्हार के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सैनिटरी पैड वितरण को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायत के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को छात्राओं को वितरित किए गए सैनिटरी पैड पर सितंबर 2022 की एक्सपायरी तिथि अंकित थी। इसके अलावा मुफ्त वितरण के लिए आए पैड बेचने और छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप भी लगाए गए हैं।

विद्यार्थियों का कहना है कि छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े इस मामले में केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

अधिकारियों की समझाइश के बाद भी नहीं माने विद्यार्थी

मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनसे बातचीत कर समझाने का प्रयास किया, लेकिन विद्यार्थी अपनी मांग पर अड़े रहे।

उनका सवाल है कि यदि विद्यालय में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, तो केवल शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेज देने से जवाबदेही कैसे तय होगी? विद्यार्थियों ने सैनिटरी पैड वितरण, कथित बिक्री और छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार के मामलों की अलग-अलग जांच कराने की मांग भी उठाई।

प्राचार्य समेत तीन शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजा गया

मामले की जांच के बाद प्राचार्य वेद प्रकाश शुक्ला, व्याख्याता रश्मि गुप्ता और व्याख्याता संजय दुबे को दूसरे विद्यालयों में कार्य करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने कलेक्टर के अनुमोदन के बाद 9 अक्टूबर को संबंधित आदेश जारी किए थे।

  • वेद प्रकाश शुक्ला, प्राचार्य: शासकीय हाई स्कूल, कुकुर्दीकेरा।
  • रश्मि गुप्ता, व्याख्याता: शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पचपेड़ी।
  • संजय दुबे, व्याख्याता: शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ओखर।

ये आदेश राज्य शासन से नियमित स्थानांतरण आदेश जारी होने की प्रत्याशा में किए गए थे।

जांच में दुर्व्यवहार और अतिरिक्त वसूली की अनियमितताएं भी सामने आईं

जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार, शैक्षणिक गतिविधियों में अनियमितताओं और शुल्क वसूली से संबंधित शिकायतें मिली थीं। जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय दल ने विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज करने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

प्रशासन के मुताबिक, जांच में प्राचार्य से संबंधित विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार, सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने में अनियमितता, शाला शुल्क के नाम पर प्रति विद्यार्थी 500 रुपये अतिरिक्त वसूली और शैक्षणिक दायित्वों में लापरवाही के मामले सामने आए।

व्याख्याता रश्मि गुप्ता के संबंध में भी विद्यार्थियों से दुर्व्यवहार और शैक्षणिक कार्यों में अनियमितताओं की जानकारी दी गई। वहीं, व्याख्याता संजय दुबे के खिलाफ भी दुर्व्यवहार और गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने की बात प्रशासन ने कही थी।

अब एफआईआर दर्ज कराने की मांग

विभागीय जांच और शिक्षकों को दूसरे विद्यालयों में भेजने की कार्रवाई के बाद भी विद्यार्थी संतुष्ट नहीं हैं। वे जानना चाहते हैं कि एक्सपायरी सैनिटरी पैड छात्राओं तक कैसे पहुंचे, मुफ्त वितरण के लिए उपलब्ध पैड बेचने के आरोपों की जिम्मेदारी किसकी है और इन मामलों में आपराधिक कार्रवाई कब होगी।

विद्यार्थियों की मांग है कि जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका समेत शिकायत के सभी बिंदुओं की जांच की जाए। यदि जांच में आपराधिक कृत्य के साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज की जाए।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभागीय कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन विद्यार्थियों की ओर से उठाई गई एफआईआर की मांग पर आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। आरोपों से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी का विधिसम्मत निर्धारण होना बाकी है।

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