राम मंदिर चंदा संग्रह मामले में भाजपा विधायक और वीएचपी नेता पर गंभीर आरोप

एसआईटी को साक्ष्यों के साथ शिकायत, चंदे के पैसों से बेहिसाब संपत्ति बनाने का दावा; निष्पक्ष जांच की मांग तेज
• कर्नाटक के भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण, वीएचपी नेता गोपाल और एक सहयोगी के खिलाफ एसआईटी में शिकायत।
• सामाजिक कार्यकर्ता ने चंदा संग्रह में कथित अनियमितताओं और बेनामी संपत्ति के साक्ष्य सौंपने का दावा किया।
• श्रीराम मंदिर से जुड़े अन्य विवाद में चंपत राय पर भी मंदिर की संपत्ति हड़पने के आरोप दोहराए गए।
• शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
अयोध्या ( शिखर दर्शन ) // श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब कर्नाटक के भाजपा विधायक प्रभु चव्हाण, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के नेता गोपाल तथा उनके सहयोगी सतीश नौबड़े के खिलाफ विशेष जांच दल (एसआईटी) में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित चंदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और उसी धन के माध्यम से बेहिसाब तथा कथित बेनामी संपत्ति अर्जित की गई। शिकायतकर्ता ने एसआईटी को दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पाटिल ने उत्तर प्रदेश एसआईटी को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया है कि राम मंदिर निर्माण अभियान के दौरान चंदा संग्रह की प्रक्रिया में वित्तीय गड़बड़ियां हुईं। उनका दावा है कि संबंधित व्यक्तियों की संपत्तियों में चंदा अभियान के बाद असामान्य वृद्धि हुई, जिसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। शिकायत में कहा गया है कि करोड़ों रुपये के लेन-देन और अचल संपत्तियों की भी जांच की जाए ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।
शिकायतकर्ता ने एसआईटी से यह भी मांग की है कि आरोपियों की कथित बेनामी संपत्तियों, बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और चंदा संग्रह से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जाए। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो चंदा संग्रह से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
इसी बीच श्रीराम मंदिर से जुड़े एक अन्य विवाद ने भी तूल पकड़ लिया है। हरिशंकर सफरीवाला ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर राम निवास धाम मंदिर की संपत्ति पर कथित अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि वर्ष 1987 में पंजीकृत राम निवास धाम मंदिर को मंदिर समिति की जानकारी और सहमति के बिना पुजारी के माध्यम से अपने कब्जे में लिया गया। आरोप है कि लगभग 5 करोड़ 80 लाख रुपये में सौदे की प्रक्रिया पूरी की गई और 60 लाख रुपये अग्रिम देकर मंदिर पर कब्जा कर लिया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मंदिर की लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति तथा करीब 250 बीघा भूमि पर जबरन कब्जा किया गया। इसके साथ ही मंदिर की मूर्तियां, दान राशि, सिंहासन, पलंग और अन्य कीमती सामान भी अपने कब्जे में ले लिया गया। उनका कहना है कि मंदिर समिति द्वारा सामान और दान राशि का हिसाब तथा रसीद मांगे जाने के बावजूद कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं ने प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार तथा संबंधित जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच की मांग पर आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।



