एमपी मॉर्निंग न्यूज़: अक्षय तृतीया पर 20 हजार शादियां, महिला आरक्षण पर BJP का वार

सीएम मोहन यादव का व्यस्त दौरा, परशुराम जन्मस्थली जानापाव जाएंगे, रात में उज्जैन में रुकेंगे
भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश में अक्षय तृतीया के अवसर पर आज बड़े पैमाने पर विवाह समारोह आयोजित हो रहे हैं। प्रदेशभर में 20 हजार से अधिक शादियां होने का अनुमान है, जहां इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उज्जैन में आयोजित एक बड़े सामूहिक विवाह सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे, जिससे आयोजन को विशेष महत्व मिल गया है।
महिला आरक्षण बिल को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गर्म हो गई है। बिल पास नहीं होने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी विपक्ष, खासकर कांग्रेस को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। आगामी 10 दिनों तक कांग्रेस के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा, जिसमें जमीनी स्तर पर प्रदर्शन और जनसंपर्क कार्यक्रम शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इस विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी की रणनीति स्पष्ट करेंगे। भाजपा इस अभियान के जरिए कांग्रेस की नीतियों को महिला विरोधी बताने की कोशिश करेगी।
परशुराम जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव भी जाएंगे। यहां आयोजित ‘परशुराम प्रकटोत्सव’ में शामिल होकर वे महाभारतकालीन अस्त्र-शस्त्रों और चक्रव्यूह कला पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ करेंगे। साथ ही सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे।
मुख्यमंत्री का आज का कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहेगा। वे सुबह 10 बजे भाजपा प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, इसके बाद पीएम श्री हेली सेवा का उद्घाटन करेंगे। उज्जैन पहुंचकर पुलिस लाइन हेलीपैड पर नए प्रतीक्षालय का लोकार्पण करेंगे और सामूहिक विवाह समारोह में शामिल होंगे। इसके बाद विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हुए जानापाव, धार और इंदौर का दौरा करेंगे। इंदौर में बड़ा गणपति से परशुराम जयंती शोभा यात्रा का शुभारंभ करने के बाद वे रात 8 बजे उज्जैन पहुंचेंगे, जहां रात्रि विश्राम करेंगे।
वहीं कांग्रेस संगठन में भी हलचल देखने को मिल रही है। हाल ही में तीन दिनों तक चले मंथन के बाद जिला और ब्लॉक अध्यक्षों के कार्यों की समीक्षा की गई है। सूत्रों के अनुसार कई जिला अध्यक्ष अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे हैं, जिसके चलते आने वाले समय में संगठनात्मक बदलाव संभव है। माना जा रहा है कि करीब 8 महीने के भीतर ही कुछ जिला अध्यक्षों को बदला जा सकता है, जिससे पार्टी में नई सक्रियता लाने की कोशिश होगी।



