राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में मंथन तेज: क्रॉस वोटिंग का डर, विधायकों की आपात बैठक आज

मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी के बाद बढ़ी हलचल, आलाकमान ने दिया सख्त संदेश
भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। चुनाव में किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए पार्टी ने विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनाव में किसी भी प्रकार की चूक या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के मद्देनजर सभी विधायकों को बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
शाम 5 बजे होगी अहम बैठक
राज्यसभा चुनाव की रणनीति तय करने के लिए शनिवार शाम 5 बजे कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित की गई है। बैठक में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। पार्टी नेताओं द्वारा विधायकों के साथ मतदान प्रक्रिया और चुनावी रणनीति को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
कमलनाथ नहीं होंगे शामिल, लेकिन रणनीति पर बनी सहमति
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं होंगे। हालांकि पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने हाल ही में दिल्ली में कमलनाथ से मुलाकात कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की है। पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए किसी भी प्रकार के मतभेद से इनकार कर रहा है।
महिला चेहरे पर दांव, दिग्गजों की उम्मीदें टूटीं
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में थे, लेकिन आलाकमान ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया। दिग्विजय सिंह की रिक्त हो रही सीट पर मीनाक्षी को मैदान में उतारकर पार्टी ने महिला नेतृत्व और संगठनात्मक अनुभव पर भरोसा जताया है।
राहुल गांधी की भरोसेमंद नेता मानी जाती हैं मीनाक्षी
मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की वरिष्ठ और सक्रिय नेताओं में गिनी जाती हैं। छात्र राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाली मीनाक्षी 1999 से 2002 तक एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उन्हें राहुल गांधी की करीबी और उनकी कोर टीम का महत्वपूर्ण सदस्य माना जाता है।
उम्मीदवार घोषित होते ही उठे असंतोष के स्वर
मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद कांग्रेस के भीतर कुछ नेताओं की नाराजगी भी सामने आई है। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जताते हुए दिग्विजय सिंह को दोबारा राज्यसभा भेजने की पैरवी की। हालांकि संगठन फिलहाल किसी बड़े असंतोष को स्वीकार नहीं कर रहा है।
भोपाल से दिल्ली तक बढ़ी राजनीतिक हलचल
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में चल रही बैठकों और अंदरूनी गतिविधियों ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का पूरा फोकस अपने विधायकों को एकजुट रखने और सीट सुरक्षित करने पर है। वहीं भाजपा भी कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ऐसे में 18 जून का चुनाव मध्य प्रदेश की राजनीति में एक अहम परीक्षा साबित हो सकता है।



