जयकारों के बीच निकली मां उमा की शाही सवारी, शिप्रा तट पर जवारे विसर्जन के साथ महोत्सव संपन्न

मध्यप्रदेश के उज्जैन में पांच दिवसीय उमा सांझी महोत्सव का सोमवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर से माता उमा की भव्य सवारी निकाली गई। चांदी की पालकी में विराजित माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन और जयकारों के बीच सवारी शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई शिप्रा नदी के रामघाट पहुंची, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के बाद जवारे और संजा का विसर्जन किया गया।
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) //
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन, माता उमा को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर
माता उमा की सवारी सोमवार शाम करीब 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में विधि-विधान से पूजन के बाद रवाना हुई। मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने माता उमा की चांदी की प्रतिमा का विशेष पूजन-अर्चन किया। इसके बाद प्रतिमा को आकर्षक रजत पालकी में विराजमान किया गया।

मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने माता उमा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। धार्मिक परंपरा और राजसी वैभव के संगम ने सवारी को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
घुड़सवारों और मंदिर के बैंड ने बढ़ाई सवारी की शोभा
माता उमा की सवारी में घुड़सवार, सशस्त्र पुलिस बल और श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति का बैंड शामिल रहा। सवारी के साथ डोल रथ पर गरुड़ पर विराजमान माता और भगवान महेश की पीतल की प्रतिमाएं भी आकर्षण का केंद्र रहीं।

सवारी के मार्ग में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। पूरे आयोजन में धार्मिक उल्लास और पारंपरिक आस्था का वातावरण बना रहा।
शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रामघाट पहुंची सवारी
मंदिर से निकलने के बाद माता उमा की सवारी महाकाल चौराहा, महाकाल घाटी और तोपखाना होते हुए आगे बढ़ी। इसके बाद दौलतगंज चौराहा, नई सड़क, कंठाल, सराफा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए शिप्रा नदी के रामघाट पहुंची।
सवारी के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं ने माता का स्वागत किया और जयकारे लगाए। मार्ग पर धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला।

रामघाट पर पूजन के बाद जवारे और संजा का विसर्जन
रामघाट पहुंचने पर माता उमा की प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद उमा सांझी महोत्सव से जुड़े पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए और जवारे तथा संजा का विसर्जन किया गया।
‘जय मां उमा’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारों के बीच पांच दिवसीय महोत्सव का समापन हुआ। उज्जैन की धार्मिक परंपराओं से जुड़े इस आयोजन में माता उमा की सवारी ने श्रद्धालुओं को भक्ति और संस्कृति के दर्शन कराए।



