12 जुलाई महाकाल भस्म आरती : मस्तक पर ‘ॐ’ का दिव्य तिलक, अलौकिक श्रृंगार में भक्तों को दिए बाबा महाकाल ने दर्शन

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट : विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रविवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच भगवान महाकाल की प्रातःकालीन भस्म आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर बाबा महाकाल का मस्तक पर ‘ॐ’ का दिव्य तिलक अंकित कर भव्य एवं आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
पूजन-अर्चना की शुरुआत गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं के पूजन से हुई। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। भांग, चंदन, रजत आभूषणों तथा सुगंधित पुष्पों से बाबा का मनोहारी श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण की परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान कर कपूर आरती संपन्न हुई। इसके पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर विधिवत भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के उपरांत भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं एवं सुगंधित पुष्पमालाएं अर्पित कर दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया।
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। रविवार प्रातःकालीन भस्म आरती में देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी प्रकट कीं। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान रहा।



