दुर्ग संभाग

DMF फंड में गड़बड़ी का आरोप: आधा बना साइकिल स्टैंड, कागजों में पूरा भुगतान; जांच के दायरे में निर्माण कार्य

बोरगांव हाई स्कूल में 13.86 लाख के काम पर सवाल, सरपंच ने ठेकेदार पर लगाए गंभीर आरोप, जनपद CEO बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई

बालोद (शिखर दर्शन) // जिले के आदिवासी विकासखंड डौंडी की ग्राम पंचायत बोरगांव में जिला खनिज न्यास (DMF) मद से कराए गए निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। हाई स्कूल परिसर में बच्चों के लिए स्वीकृत साइकिल स्टैंड शेड और कांक्रीटीकरण कार्य को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। करीब 13 लाख 86 हजार रुपये की लागत वाले इस निर्माण में आधा-अधूरा काम कर कागजों में कार्य पूर्ण दर्शाने का आरोप लगाया गया है। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर निर्माण की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

वर्ष 2025 में बोरगांव हाई स्कूल में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए साइकिल स्टैंड शेड और सीसी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया था। निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत बोरगांव को बनाया गया, लेकिन आरोप है कि पंचायत की जगह डौंडी के एक ठेकेदार विशाल जैन ने निर्माण कार्य अपने हाथ में ले लिया। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि कार्य नियमों के अनुरूप नहीं कराया गया और अधूरा छोड़ने के बावजूद दस्तावेजों में इसे पूर्ण दिखा दिया गया।

पुरानी दीवार पर खड़ा कर दिया साइकिल स्टैंड

ग्रामीणों के अनुसार ठेकेदार ने नई संरचना तैयार करने के बजाय स्कूल की पुरानी बाउंड्री वॉल पर केवल चार ईंटें जोड़कर उसी पर पिलर खड़े कर दिए और साइकिल स्टैंड का शेड तैयार कर दिया। सामने की ओर लगाए गए कई कॉलम भी निम्न गुणवत्ता के बताए जा रहे हैं। परिसर में केवल कुछ हिस्सों में सीसी निर्माण किया गया, जबकि सूचना बोर्ड में कार्य पूर्ण होने की तिथि 12 जून 2026 अंकित कर दी गई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि मौके पर अभी भी लगभग आधा कार्य अधूरा है।

सरपंच बोलीं- विरोध किया, लेकिन किसी ने नहीं सुनी

ग्राम पंचायत बोरगांव की सरपंच देवकी बाई कोठपरिया ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने स्वयं को स्वीकृत कार्यों का जिम्मेदार बताते हुए निर्माण शुरू कराया। उन्होंने कहा कि पुरानी दीवार पर शेड बनाने का कई बार विरोध किया गया, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। सरपंच का कहना है कि पंचायत के खाते में राशि आते ही चेक के माध्यम से भुगतान करा लिया गया और अब अधूरे एवं घटिया निर्माण की जवाबदेही पंचायत पर आ रही है।

पूरे विकासखंड में ठेकेदारों के हस्तक्षेप के आरोप

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि आदिवासी विकासखंड की कई पंचायतों में DMF से स्वीकृत कार्यों पर ठेकेदारों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। पंचायतों के नाम पर स्वीकृत कार्यों को निजी स्तर पर कराए जाने तथा गुणवत्ता से समझौता किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इससे पहले भी विभिन्न पंचायतों में जल शुद्धिकरण संयंत्रों के नाम पर कथित अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं।

CEO बोले- शिकायत सही मिली तो होगी कार्रवाई

जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) डी.डी. मांडले ने प्रारंभिक तौर पर किसी गड़बड़ी से इनकार किया, लेकिन जब उन्हें संबंधित दस्तावेज और स्थल से जुड़े तथ्य दिखाए गए तो उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी अनियमितता पाई जाती है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्य का मूल्यांकन और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब इस मामले में निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो DMF राशि के उपयोग, निर्माण गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।

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