दुर्ग संभाग

‘मोदी की गारंटी’ पर सवाल: नियमितीकरण की मांग को लेकर विद्यामितान शिक्षकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

संविलियन, सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन की मांग; प्रदेशभर में प्रदर्शन, कई सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित

दुर्ग ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कार्यरत राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। प्रदेशभर के हजारों विद्यामितान शिक्षक 1 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं और नियमितीकरण, संविलियन, सेवा सुरक्षा तथा सम्मानजनक वेतन की मांग को लेकर विभिन्न जिलों में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षामंत्री के गृह जिला दुर्ग सहित कई स्थानों पर शिक्षकों ने प्रदर्शन कर सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग की।

चुनावी वादों का हवाला देकर सरकार से जवाब मांग रहे शिक्षक

आंदोलनरत शिक्षकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान ‘मोदी की गारंटी’ के तहत अतिथि शिक्षकों के संविलियन और नियमित समायोजन का वादा किया गया था। उनका आरोप है कि सरकार बनने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। शिक्षकों का कहना है कि कई बार विभागीय स्तर पर चर्चा और विधानसभा में मुद्दा उठने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।

वर्षों से पढ़ा रहे, फिर भी नहीं मिली सेवा सुरक्षा

राज्य अतिथि शिक्षक कल्याण संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में वे पिछले करीब दस वर्षों से नियमित शिक्षकों की तरह शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद आज भी उन्हें अस्थायी कर्मचारी की तरह कार्य करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि हर नए शैक्षणिक सत्र में पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे पूरे वर्ष नौकरी को लेकर असमंजस बना रहता है।

वेतन और सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी

शिक्षकों का कहना है कि उन्हें प्रतिमाह 20 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है, लेकिन इसका भुगतान भी वर्ष में केवल 10 माह के लिए किया जाता है। ग्रीष्मकालीन अवकाश का वेतन नहीं मिलता, वहीं मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश, चिकित्सा अवकाश और अन्य सेवा संबंधी सुविधाओं से भी वे वंचित हैं। समान कार्य करने के बावजूद नियमित शिक्षकों जैसी सुविधाएं नहीं मिलने से उनमें असंतोष बढ़ता जा रहा है।

हड़ताल से स्कूलों की पढ़ाई पर असर

प्रदेशव्यापी हड़ताल का असर अब सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। राज्य अतिथि शिक्षक कल्याण संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक नियमितीकरण, संविलियन, सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन सहित उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।

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