तंत्र-मंत्र के अंधविश्वास ने उजाड़ दिया परिवार, दो बेटों की हत्या के मामले में मां समेत चार को उम्रकैद

गुरु पूजा और तंत्र साधना के नाम पर रची गई थी खौफनाक साजिश, विरोध करने वाले दो भाइयों को कीटनाशक पिलाकर उतारा मौत के घाट
बिलासपुर / सक्ती ( शिखर दर्शन ) // अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के जाल में फंसे एक परिवार की सनसनीखेज कहानी का अदालत ने आखिरकार फैसला सुना दिया है। बाराद्वार थाना क्षेत्र के ग्राम तांदुलडीह में दो सगे भाइयों की हत्या के मामले में अदालत ने उनकी मां, दो बहनों और एक भाई को दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना था, जिसमें तंत्र साधना के नाम पर अपने ही परिवार के दो युवकों की हत्या कर दी गई थी।
सात दिनों तक घर में चलता रहा तंत्र अनुष्ठान
पुलिस जांच के अनुसार अक्टूबर 2024 में तांदुलडीह निवासी फिरीतबाई सिदार अपने बच्चों के साथ घर के एक कमरे में लगातार सात दिनों तक बंद रही। इस दौरान घर के भीतर तंत्र साधना, पूजा-पाठ और विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे थे। पड़ोसियों ने कई दिनों तक परिवार के किसी सदस्य को बाहर नहीं देखा और घर से अजीब गतिविधियों तथा आवाजों के चलते पुलिस को सूचना दी।
अचेत हालत में मिले दोनों भाई
सूचना मिलने पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो घर के अंदर तंत्र पूजा चल रही थी। एक कमरे में उज्जैन के एक बाबा की तस्वीर रखी हुई थी और परिवार के सदस्य पूजा-पाठ में लीन थे। इसी दौरान विकास सिदार (25) और विक्की सिदार (22) अचेत अवस्था में जमीन पर पड़े मिले। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
‘जय गुरुदेव’ के नारों के बीच खुला राज
पुलिस जब घर पहुंची तब परिवार के सदस्य ‘जय गुरुदेव’ के नारे लगा रहे थे और दावा कर रहे थे कि दोनों युवक विशेष साधना के लिए गए हैं तथा उन्हें दोबारा जीवित किया जा सकता है। परिवार के इस व्यवहार ने पुलिस का संदेह बढ़ाया और मामले की गहन जांच शुरू की गई।
अंधविश्वास का विरोध करना पड़ा भारी
जांच में सामने आया कि परिवार की बड़ी बेटी अमरिका सिदार करीब छह वर्ष पहले उज्जैन के एक बाबा से गुरु दीक्षा लेकर आई थी। इसके बाद परिवार में तंत्र साधना और अंधविश्वास का प्रभाव लगातार बढ़ता गया। मृतक विकास और विक्की इस तरह की गतिविधियों का विरोध करते थे और परिवार को इससे दूर रहने की सलाह देते थे। पुलिस के अनुसार इसी विरोध के कारण दोनों भाइयों को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।
कीटनाशक पिलाकर और गला घोंटकर की गई हत्या
विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दोनों भाइयों को धार्मिक अनुष्ठान और गुरु पूजा में शामिल होने के बहाने बुलाया गया। इसके बाद उन्हें पानी में कीटनाशक मिलाकर पिलाया गया और उनकी हत्या कर दी गई। बाद में पूरे घटनाक्रम को धार्मिक साधना का स्वरूप देने का प्रयास किया गया ताकि संदेह न हो।
एफएसएल जांच में मिले अहम सबूत
घटनास्थल से पुलिस और एफएसएल टीम ने पूजा सामग्री, हवन सामग्री, धार्मिक साहित्य, नोटबुक, जड़ी-बूटियां, कीटनाशक और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुएं जब्त की थीं। वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने पूरे षड्यंत्र की परतें खोल दीं।
डेढ़ साल चली सुनवाई, चारों दोषी करार
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष गवाहों के बयान, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। सभी तथ्यों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने फिरीतबाई सिदार, अमरिका सिदार, चंद्रिका सिदार और विशाल सिदार को दोहरे हत्याकांड का दोषी माना।
अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सजा
करीब डेढ़ वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों के अपराध को संदेह से परे सिद्ध करते हैं। इस मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक उदय वर्मा ने पैरवी की।
अंधविश्वास की कीमत बनी दो जिंदगियां
यह मामला एक बार फिर बताता है कि अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र जैसी कुरीतियां किस तरह परिवारों को तबाही की ओर धकेल सकती हैं। जिस घर में आस्था और साधना के नाम पर पूजा की जा रही थी, वहीं दो युवकों की जान चली गई और पूरा परिवार सलाखों के पीछे पहुंच गया।



