बिलासपुर संभाग

सड़क के अभाव में अंतिम संस्कार बना परीक्षा, कीचड़ और नदी पार कर श्मशान पहुंचे ग्रामीण

एक किलोमीटर दलदल पार कर बोराई नदी के उस पार हुआ अंतिम संस्कार, विकास के दावों पर उठे सवाल

विकास के दावों की खुली पोल, जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर गांव में आज भी नहीं है श्मशान तक पहुंचने लायक सड़क

सक्ती (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ में विकास के दावों के बीच सक्ती जिले के ग्राम पंचायत सोंठी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी। गांव की 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला के निधन के बाद परिजनों और ग्रामीणों को उनका शव करीब एक किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर कीचड़ भरे रास्ते से ले जाना पड़ा। इतना ही नहीं, अंतिम संस्कार के लिए बोराई नदी भी पैदल पार करनी पड़ी। यह मार्मिक दृश्य न केवल ग्रामीणों की मजबूरी को बयां करता है, बल्कि प्रशासनिक दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत सोंठी निवासी कमलाबाई महंत (60 वर्ष) का शुक्रवार रात बीमारी के कारण निधन हो गया। शनिवार सुबह जब परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर निकले तो गांव से श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता हालिया बारिश के कारण पूरी तरह दलदल में तब्दील हो चुका था। सड़क पर घुटनों तक कीचड़ और पानी भर जाने से किसी भी वाहन का पहुंचना संभव नहीं था।

ऐसे में ग्रामीणों ने मानवता और सहयोग का परिचय देते हुए शव को अपने कंधों पर उठाया और बेहद कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़े। फिसलन भरे रास्ते पर कई बार संभलते हुए वे किसी तरह करीब एक किलोमीटर की दूरी तय कर सके। इसके बाद भी कठिनाई समाप्त नहीं हुई। श्मशान पहुंचने से पहले सभी को पानी से लबालब भरी बोराई नदी पैदल पार करनी पड़ी। नदी पार करने के बाद ही अंतिम संस्कार संपन्न हो सका।

हर बारिश में दोहराई जाती है यही पीड़ा

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर वर्ष बरसात के मौसम में गांव का संपर्क मार्ग दलदल में बदल जाता है। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, गर्भवती महिलाओं और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत तब होती है, जब किसी की मृत्यु हो जाती है और शव को इसी दुर्गम रास्ते से श्मशान तक ले जाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि रेलवे फाटक से बोराई नदी तक लगभग एक किलोमीटर सड़क निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है। ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत मिट्टी-मुरुम सड़क निर्माण का प्रस्ताव भी जनपद पंचायत को भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक उसे स्वीकृति नहीं मिल सकी। परिणामस्वरूप हर मानसून में गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है और लोगों को ऐसी विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

सचिव बोले- प्रस्ताव भेजा जा चुका है

ग्राम पंचायत सोंठी के सचिव रामनारायण सिदार ने बताया कि रेलवे फाटक से बोराई नदी तक सड़क निर्माण के लिए मनरेगा के अंतर्गत प्रस्ताव जनपद पंचायत को भेजा जा चुका है। प्रस्ताव स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस सड़क का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम यात्रा इस तरह की पीड़ादायक परिस्थितियों में पूरी न करनी पड़े।

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