फैसले के बाद पूर्व जज पर मौत का साया: लंदन में बेटी को मिली धमकी, पूरे परिवार को खत्म करने की चेतावनी

दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद पर निर्णय के बाद बढ़ा खतरा, फैसला वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव
मुंबई ( शिखर दर्शन ) // बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम पटेल और उनका परिवार पिछले करीब 10 महीनों से लगातार जान से मारने की धमकियों का सामना कर रहा है। मामला दाऊदी बोहरा समुदाय के उत्तराधिकार विवाद पर दिए गए उनके फैसले से जुड़ा बताया जा रहा है। हाल ही में लंदन में रह रही उनकी बेटी अदिति पटेल को एक गुमनाम धमकी भरा पत्र मिला, जिसमें पूर्व जज से अपना फैसला सार्वजनिक रूप से वापस लेने की मांग की गई है। ऐसा नहीं करने पर पूरे परिवार का अंतिम संस्कार कर देने की चेतावनी दी गई है।
10 महीने से मिल रही धमकियां
जानकारी के अनुसार, जस्टिस गौतम पटेल ने वर्ष 2024 में दाऊदी बोहरा समुदाय के बहुचर्चित उत्तराधिकार विवाद पर फैसला सुनाया था। इसके बाद से उन्हें और उनके परिजनों को लगातार धमकियां मिलने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि धमकी देने वाले लोग उनसे यूट्यूब पर वीडियो जारी कर अपने फैसले को वापस लेने और यह कहने का दबाव बना रहे हैं कि फैसला दबाव में दिया गया था।
लंदन में बेटी को मिला धमकी भरा पत्र
लंदन में रहने वाली उनकी बेटी अदिति पटेल को 5 जून को एक गुमनाम पत्र मिला, जिसमें बेहद गंभीर और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। पत्र में पूरे परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। इस घटना के बाद ब्रिटेन की पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि धमकी देने वालों ने फैसला वापस नहीं लेने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
क्या है दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद?
दाऊदी बोहरा समुदाय इस्लाम के शिया संप्रदाय की मुस्तअली इस्माइली शाखा से जुड़ा एक प्रमुख धार्मिक समुदाय है। वर्ष 2014 में 52वें धर्मगुरु सैयद मोहम्मद बुरहानुद्दीन के निधन के बाद उत्तराधिकार को लेकर विवाद शुरू हुआ था, जो बाद में अदालत तक पहुंचा। इसी मामले में जस्टिस गौतम पटेल ने फैसला सुनाया था। यह विवाद लंबे समय तक देश और विदेश में चर्चा का विषय बना रहा।
न्यायपालिका की सुरक्षा पर उठे सवाल
पूर्व न्यायाधीश ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर सुरक्षा चुनौती बताते हुए संबंधित एजेंसियों को जानकारी दी है। भारत और ब्रिटेन दोनों देशों में मामले को लेकर जांच जारी है। न्यायिक फैसले के बाद एक पूर्व जज और उनके परिवार को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने न्यायपालिका की सुरक्षा और न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।



