घुसपैठियों के मुद्दे पर सियासत गरम: शुभेंदु अधिकारी के दावे से बढ़ी राजनीतिक हलचल

4,800 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को भेजे जाने का दावा, सीमावर्ती जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाए जाने की कही बात
कोलकाता ( शिखर दर्शन ) // पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि पिछले एक महीने के दौरान 4,800 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा गया है, जबकि 836 अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें भी डिपोर्ट करने की प्रक्रिया चल रही है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में किया दावा
भाजपा द्वारा आयोजित ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महा अभियान 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में विशेष होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं, जहां अवैध रूप से रह रहे लोगों को रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि इन केंद्रों में मौजूद 836 लोगों को भी जल्द बांग्लादेश भेजने की तैयारी की जा रही है।
सीमा सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
कार्यक्रम के दौरान अधिकारी ने कहा कि राज्य में अवैध घुसपैठ एक गंभीर चुनौती है और सीमा सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और बाड़बंदी को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उनके अनुसार, सीमा प्रबंधन को लेकर केंद्र और सुरक्षा एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं।
‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति का उल्लेख
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” की नीति पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पहले पकड़े गए लोगों को जेलों में रखा जाता था, जबकि अब उनके सत्यापन और निर्वासन की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।
लंबी सीमा, सुरक्षा बड़ी चुनौती
पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा के कुछ हिस्सों में अब भी बाड़बंदी का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है, जिसके कारण घुसपैठ और तस्करी जैसे मुद्दे समय-समय पर चर्चा में आते रहते हैं।
दावों पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
हालांकि, 4,800 लोगों को डिपोर्ट किए जाने और 836 अन्य लोगों की प्रक्रिया संबंधी दावों पर संबंधित सरकारी एजेंसियों या आधिकारिक विभागों की ओर से विस्तृत पुष्टि का इंतजार है। राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह विषय और अधिक चर्चा में रह सकता है।



