दिल्ली

संसद में आज बड़े बदलाव की तैयारी: महिला आरक्षण और परिसीमन समेत 3 संशोधन बिल पेश होंगे

लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव, 2029 से 33% महिला आरक्षण लागू करने की दिशा

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // देश की राजनीति में आज एक महत्वपूर्ण मोड़ आने जा रहा है, जहां संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन समेत तीन अहम संशोधन विधेयक पेश किए जाएंगे। इन प्रस्तावों के जरिए न केवल महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का भी प्रावधान किया गया है।

सरकार द्वारा लाए जा रहे इन विधेयकों का उद्देश्य वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूर्ण रूप से लागू करना है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में वर्ष 2029 से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से सीटों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा, जिसमें कुल 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

विधेयकों पर 16 से 18 अप्रैल तक संसद में विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है, जिसमें लोकसभा में लगभग 18 घंटे और राज्यसभा में 10 घंटे तक बहस होगी। सरकार को इन विधेयकों को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसके चलते सभी प्रमुख दलों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए हैं।

प्रस्तावित तीन विधेयकों में केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिला आरक्षण सुनिश्चित करने, संविधान संशोधन के जरिए जनसंख्या के आधार पर सांसदों की संख्या बढ़ाने तथा परिसीमन के माध्यम से सीटों का पुनर्वितरण करने के प्रावधान शामिल हैं। इन बदलावों से देश की राजनीतिक संरचना में व्यापक परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि विपक्ष ने इन प्रस्तावों को लेकर आपत्ति जताई है और विशेष रूप से परिसीमन के प्रावधानों का विरोध करने की रणनीति बनाई है। विपक्षी दलों का तर्क है कि जनगणना के अद्यतन आंकड़ों के बिना इस प्रकार के निर्णय जल्दबाजी में लिए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।

सरकार का पक्ष है कि इन संशोधनों के माध्यम से लोकतंत्र को अधिक समावेशी और सशक्त बनाया जाएगा, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक संतुलन में बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम मान रहा है। ऐसे में इन विधेयकों पर होने वाली चर्चा देश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय करने वाली मानी जा रही है।

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