1 नवंबर महाकाल भस्म आरती: भाल पर चंद्र, शीश पर पुष्पमाला से सजे बाबा महाकाल, दिव्य स्वरूप के हुए दर्शन

कार्तिक कृष्ण सप्तमी पर तड़के चार बजे खुले मंदिर के पट, पंचामृत अभिषेक के बाद रजत मुकुट, मुंडमाल और रुद्राक्ष से हुआ अलौकिक श्रृंगार
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर रविवार तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके साथ ही भगवान महाकाल की भस्म आरती की तैयारियां शुरू हुईं। विधि-विधान से पूजन और अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का मनोहारी श्रृंगार किया गया। भाल पर चंद्र और शीश पर पुष्पमालाओं से सजे अवंतिका के अधिपति के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक कर चंदन, भांग और आभूषणों से बाबा का विशेष अलंकरण किया गया।
भस्म अर्पण के बाद हुआ दिव्य श्रृंगार
भस्म अर्पित करने से पहले प्रथम घंटाल बजाकर भगवान को हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के साथ ध्यान और पूजन के बाद कपूर आरती संपन्न हुई। इसके पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर विधि-विधान के साथ भस्म रमाई गई।

भस्म आरती के बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। विविध आभूषणों और पुष्पों से सजे बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर
सुबह की भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कानों में अपनी मनोकामनाएं कहकर आशीर्वाद मांगा। आरती के दौरान मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।



