राज्योत्सव में तीन दिन गूंजेगी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, 30 से अधिक कलाकार बिखेरेंगे हुनर का रंग

पंडवानी से सूफी संगीत, कथक से आदिवासी नृत्य तक सजेगा सांस्कृतिक मंच; न्यायधानी बिलासपुर के अंकित निर्मलकर सूफी ,गजल और सुगम गायन की देंगे प्रस्तुति….
रायपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर राजधानी रायपुर में तीन दिनों तक कला, संगीत और लोकसंस्कृति का भव्य संगम देखने को मिलेगा। 1 से 3 नवंबर तक आयोजित सांस्कृतिक समारोह में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के विविध रंग बिखेरेंगे। कार्यक्रम में लोकगीत, पंडवानी, लोकसंगीत, लोककंच, पारंपरिक सुआ, पंथी नृत्य, कथक, ओडिसी, भजन और आदिवासी लोकनृत्य सहित 30 से अधिक प्रस्तुतियां शामिल हैं।
इस सांस्कृतिक आयोजन में न्यायधानी बिलासपुर के कलाकार अंकित निर्मलकर भी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ मंच पर प्रस्तुति देंगे। 2 नवंबर को अंकित निर्मलकर सूफी, गजल और सुगम गायन के माध्यम से दर्शकों को संगीत की अलग-अलग विधाओं का आनंद कराएंगे। राज्योत्सव के मंच पर बिलासपुर के कलाकार की यह प्रस्तुति न्यायधानी की सांस्कृतिक प्रतिभा को प्रदेश स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर भी होगी।
1 नवंबर : लोकगीत और पंडवानी से होगी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत
राज्योत्सव के पहले दिन लोकगीत से लेकर पंडवानी तक की प्रस्तुतियां होंगी। कार्यक्रम में शामिल कलाकारों की सूची इस प्रकार है—
- अनुराग शर्मा, रायपुर — लोकगीत
- आर. साहू, रायपुर — लोकगीत
- शिवेंद्र मंडावी, रायपुर — लोकसंगीत एवं गिटार वादन
- राजीव श्रीवास्तव, रायपुर — पंडवानी
- दिव्यम तिवारी बैंड — लोकगीत
- संतोष कुमार सिंह — लोकगीत
- प्रयुजन बैंड — लोक प्रस्तुति
- चेतन देवांगन, दुर्ग — पंडवानी गायन
- दुर्गा साहू, रायपुर — पंडवानी गायन
- अनुष्का सुल्ताना — शास्त्रीय नृत्य
- रजनी रजक, दुर्ग — लोककंच व ढोलामारू
- वंदिता साहू, बिलासपुर — लोकगीत गायन
- पायल साहू — लोककंच
2 नवंबर : ओडिसी, कथक और सूफी संगीत का संगम, अंकित निर्मलकर की प्रस्तुति पर रहेगी नजर
दूसरे दिन का सांस्कृतिक कार्यक्रम संगीत और शास्त्रीय नृत्य की विविध विधाओं से सजेगा। इस दिन न्यायधानी बिलासपुर के अंकित निर्मलकर सूफी, गजल और सुगम गायन की प्रस्तुति देंगे। उनके साथ अन्य कलाकार भी अपनी-अपनी विधाओं में मंच पर प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
- कंचन जोशी — गायन
- प्रसन्ना अवस्थी — लोकसंगीत पर आधारित नृत्य
- सुभिता दास — ओडिसी नृत्य
- समर्पिया पूजा विष्णक — पंडवानी
- अंकित निर्मलकर, बिलासपुर — सूफी, गजल और सुगम गायन
- मिस्टीटीन बाई — पारंपरिक सुआ
- मेघा बोस तालुकर, रायपुर — पारंपरिक लोकसंगीत
- आंचल पांडे — कथक नृत्य
- रत्नमणि दीवान, धमतरी — लोककंच
- आदित्य मिश्रा, एनआईटी — बैंड प्रस्तुति
- विनिता त्रिपाठी — कथक नृत्य
- तेजराम साहू — लोककंच
इस दिन शाम 6 बजे से ‘मैं अयोध्या हूं’ नाटक का मंचन भी किया जाएगा।
3 नवंबर : भजन, पंथी और आदिवासी नृत्य से सजेगी समापन संध्या
राज्योत्सव के तीसरे और अंतिम दिन भक्ति संगीत, लोककला और जनजातीय संस्कृति की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इस दिन पंथी नृत्य, जसगीत, जागरता भजन, आदिवासी लोकसंगीत और कथक की प्रस्तुतियां होंगी।
- सुनील सोनी — गायन
- पद्मश्री उषा बारले — पंडवानी
- आस्था भट्ट, रायपुर — भजन
- आस्था भट्ट, रायपुर — आरती
- राकेश सेन, कवर्धा — लोककंच
- दिनेश जांगड़े — पंथी नृत्य
- पूर्णिमा साहू, रायपुर — जसगीत और जागरता भजन
- अभिषेक सोनकर — आदिवासी लोकसंगीत एवं नृत्य
- दीपाली पांडेय — कथक समूह
- वृंदावन चक्रवर्ती भारती — सूफी संगीत
- अनुष्का रॉय चौधरी — कथक नृत्य
- आनंद कुमार पांडेय — गायन
स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को मिलेगा बड़ा मंच
तीन दिवसीय आयोजन की खासियत यह है कि इसमें छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकविधाओं के साथ शास्त्रीय संगीत, नृत्य और आधुनिक सांगीतिक प्रस्तुतियों को भी स्थान दिया गया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों के कलाकारों को एक ही मंच पर अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। पंडवानी, पंथी, सुआ और आदिवासी लोकनृत्य जैसी विधाएं जहां छत्तीसगढ़ की जड़ों से जुड़ी सांस्कृतिक पहचान को सामने लाएंगी, वहीं सूफी संगीत, गजल, कथक और ओडिसी जैसी प्रस्तुतियां समारोह को विविधता प्रदान करेंगी।
विशेष रूप से बिलासपुर के अंकित निर्मलकर की प्रस्तुति न्यायधानी के कला प्रेमियों के लिए उत्साह का विषय है। राज्योत्सव जैसे बड़े आयोजन में स्थानीय कलाकारों की भागीदारी न केवल उनकी प्रतिभा को पहचान दिलाती है, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।



