रायपुर संभाग

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 का कल से आगाज, अमित शाह से मनसुख मांडविया तक होंगे शामिल

1 से 3 नवंबर तक नवा रायपुर में सजेगा उत्सव का मंच, ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ थीम पर केंद्रित रहेगा आयोजन; 45 से अधिक स्टॉल और सारंग टीम का एयर शो होंगे आकर्षण

नवा रायपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 26 वर्ष पूरे होने के अवसर पर तीन दिवसीय राज्योत्सव 2026 का आयोजन 1 से 3 नवंबर तक नवा रायपुर अटल नगर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर (मेला ग्राउंड) में किया जाएगा। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, विकास यात्रा और भविष्य की संभावनाओं को समर्पित इस आयोजन की मुख्य थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ रखी गई है। इसके माध्यम से महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और युवाओं के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसरों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।

मनसुख मांडविया करेंगे शुभारंभ, अमित शाह होंगे समापन समारोह के मुख्य अतिथि

राज्योत्सव का शुभारंभ 1 नवंबर को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया की उपस्थिति में होगा। 2 नवंबर को आयोजित कार्यक्रमों में राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, 3 नवंबर को होने वाले समापन समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि होंगे।

राजधानी में होने वाले मुख्य आयोजन के साथ ही प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में 2 नवंबर को जिला स्तरीय राज्योत्सव कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

45 से अधिक स्टॉलों में दिखेगी छत्तीसगढ़ की पहचान

राज्योत्सव स्थल पर विभिन्न शासकीय विभागों के लगभग 30 और अन्य संस्थानों के 15 सहित 45 से अधिक स्टॉल लगाए जा रहे हैं। यहां विभागीय विकास प्रदर्शनियों के साथ प्रदेश की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। छत्तीसगढ़ी आभूषणों, मंदिरों की कलात्मक प्रतिकृतियों और लोककला को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

आयोजन में देश के जाने-माने कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भारतीय वायुसेना की सारंग टीम का रोमांचक हवाई प्रदर्शन विशेष आकर्षण होंगे। शिल्पग्राम में पारंपरिक ढोकरा कला यानी बेलमेटल शिल्प और सजावटी कलाकृतियां भी दर्शकों को आकर्षित करेंगी।

‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ की दिखेगी तस्वीर

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ विषय पर विशेष प्रदर्शनी लगाई जा रही है। इसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति की स्थिति, पर्यटन के विस्तार, रोजगार के अवसरों और वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी पहलों को प्रदर्शित किया जाएगा।

प्रदर्शनी में कांगेर घाटी की जंगल सफारी और गुफाओं के साथ कोण्डागांव की पुष्पाल घाटी को भी दर्शाया गया है, जो तारों को निहारने के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका और सुकमा के तुंगल डैम के आकर्षक मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। धुड़मारास के धुरवा होमस्टे और देवगुड़ियों के संरक्षण के माध्यम से बस्तर की सांस्कृतिक पहचान तथा पर्यटन आधारित आजीविका की संभावनाओं को भी सामने रखा जाएगा।

वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता पर विशेष जोर

प्रदर्शनी में बारनवापारा में कई दशकों बाद काले हिरण की वापसी, औरापानी में गिद्ध संरक्षण तथा छत्तीसगढ़ के पहले रामसर स्थल कोपरा जलाशय के संरक्षण से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी।

इसके साथ ही प्रदेश के राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय वृक्ष साल, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना और राजकीय तितली के रूप में अनुमोदित ऑरेंज ओकलीफ के बारे में भी रोचक जानकारियां प्रदर्शित होंगी।

तीन दिनों तक चलने वाला यह राज्योत्सव प्रदेश की विकास यात्रा, लोक-संस्कृति, पारंपरिक शिल्प और प्राकृतिक धरोहर को एक मंच पर प्रस्तुत करेगा।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!