फसल बीमा की रकम दिलाने के बदले मांगी 75% रिश्वत, ACB ने दो कृषि विस्तार अधिकारियों को दबोचा

किसान से 90 हजार रुपये की बीमा राशि दिलाने के एवज में 67,500 रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप। शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने जाल बिछाकर 20 हजार रुपये की पहली किश्त लेते दोनों अधिकारियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
कांकेर ( शिखर दर्शन ) //
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में दो ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने फसल बीमा की राशि दिलाने के बदले किसान से कुल बीमा राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के रूप में मांगा था। शिकायत की जांच और सत्यापन के बाद एसीबी की टीम ने यह कार्रवाई की।

गिरफ्तार अधिकारियों की पहचान सुंदर लाल बच्छड़ और प्रवीण उर्फ रिंकू चंद्राकर के रूप में हुई है। दोनों आमाबेड़ा क्षेत्र में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
90 हजार रुपये की बीमा राशि के बदले मांगे 67,500 रुपये
मामला आमाबेड़ा तहसील के आलनार गांव निवासी किसान सगाऊ राम कोमरा की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, फसल खराब होने के बाद किसान को फसल बीमा के तहत 90 हजार रुपये मिलने थे। आरोप है कि बीमा राशि जारी कराने में मदद करने के बदले दोनों अधिकारियों ने कुल राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा मांगा था।
इस हिसाब से रिश्वत की कथित मांग 67,500 रुपये थी। किसान ने रिश्वत देने के बजाय इसकी शिकायत एसीबी जगदलपुर में दर्ज कराई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शिकायत का सत्यापन कर बिछाया जाल
किसान की शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने उसका सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने के बाद टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। कार्रवाई के दौरान दोनों अधिकारियों को किसान से रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 20 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
इस कार्रवाई के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया। एसीबी की ओर से मामले में आगे की जांच और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई
एसीबी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत कार्रवाई की है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
फसल खराब होने के बाद बीमा राशि किसानों के लिए आर्थिक सहारा होती है। ऐसे में बीमा राशि दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप ने किसानों से जुड़ी सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

