मध्यप्रदेश

फ्रांस से बेल्जियम तक आग उगलने लगे फ्रिज… हैकरों ने यूरोप के 4 देशों में सैकड़ों फ्रिज किए हैक, पेरिस में 150 रेफ्रिजरेटर में लगाई गई आग

साइबर हमले से सुपरमार्केट के फ्रिज हुए बेअसर, सैकड़ों दुकानों में खाद्य सामग्री खराब होने का खतरा

फ्रांस में सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम पर बड़े साइबर हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, 480 से अधिक दुकानों के फ्रिज और फ्रीजर का तापमान प्रभावित हुआ। कुछ जगहों पर तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने और आग लगने की घटनाओं की भी जानकारी दी गई है। इस हमले से खाद्य सामग्री की सुरक्षा और रिटेल कारोबार को भारी नुकसान की आशंका जताई गई है।

( शिखर दर्शन ) //

फ्रांस में इंटरनेट से जुड़े सुपरमार्केट के फ्रिज और फ्रीजर साइबर हमले का निशाना बने। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने कई दुकानों के रेफ्रिजरेशन सिस्टम की सेटिंग बदलकर उन्हें डीफ्रॉस्टिंग मोड में डाल दिया। इससे ठंडक बनाए रखने वाली व्यवस्था प्रभावित हुई और ताजा तथा जमे हुए खाद्य पदार्थ खराब होने का खतरा पैदा हो गया।

फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना से 480 से अधिक दुकानों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। कुछ स्टोरों में आग लगने की भी खबरें हैं। हालांकि, पूरे मामले में नुकसान और आग की घटनाओं के कारणों की विस्तृत पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्रधानमंत्री ने दिए जांच के आदेश

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी एएनएसएसआई (ANSSI) को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। फ्रांसीसी अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि साइबर हमले का असर दूसरे यूरोपीय देशों और कंपनियों तक तो नहीं पहुंचा।

पेरिस अभियोजन कार्यालय ने इसे बड़े पैमाने का साइबर हमला बताया है। जांच का प्रमुख पहलू यह है कि इंटरनेट से जुड़े रेफ्रिजरेशन सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच कैसे बनाई गई और सुरक्षा में मौजूद कमजोरी का किस तरह इस्तेमाल किया गया।

हैकर्स ने फ्रिजों का तापमान कैसे बढ़ाया ?

सुपरमार्केट में फ्रिज और फ्रीजर आमतौर पर एक केंद्रीय नियंत्रण प्रणाली से संचालित होते हैं। इंटरनेट से जुड़े इन सिस्टम की मदद से रखरखाव करने वाली कंपनियां दूर बैठकर भी तापमान और दूसरी सेटिंग में बदलाव कर सकती हैं।

यदि कोई साइबर अपराधी सिस्टम की सुरक्षा में मौजूद कमजोरी का फायदा उठाकर उसमें प्रवेश कर जाए, तो वह तापमान घटाने-बढ़ाने या डीफ्रॉस्टिंग प्रक्रिया शुरू करने जैसी सेटिंग बदल सकता है। डीफ्रॉस्टिंग के दौरान फ्रिज या फ्रीजर में जमी बर्फ पिघलाई जाती है। यदि यह प्रक्रिया गलत तरीके से या लंबे समय तक चलती रहे, तो अंदर रखे खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तापमान पर बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

डेनमार्क की कंपनी के सॉफ्टवेयर में मिली कमजोरी

फ्रांसीसी अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान डेनमार्क की कंपनी डैनफॉस के सॉफ्टवेयर में सुरक्षा संबंधी कमजोरी सामने आई है। कंपनी के सिस्टम का इस्तेमाल सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन उपकरणों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

डैनफॉस ने कहा है कि उसे फ्रांस में रेफ्रिजरेशन सिस्टम से जुड़ी घटनाओं की जानकारी है। कंपनी के अनुसार, प्रभावित सिस्टम में सॉफ्टवेयर के पुराने संस्करण इस्तेमाल किए जा रहे थे। कंपनी पहले भी ग्राहकों को सॉफ्टवेयर अपडेट रखने और पुराने उपकरणों को बदलने की सलाह देती रही है।

इससे पहले 9 अगस्त को साइबर सुरक्षा कंपनी क्लैरोटी ने डैनफॉस के सिस्टम में कुछ कमजोरियों को लेकर रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि इन कमजोरियों के कारण हमलावर उचित पहचान सत्यापन के बिना सिस्टम तक पहुंचने में सक्षम हो सकते हैं।

फ्रांस के खुदरा कारोबार से जुड़े संगठन एफसीडी ने डैनफॉस से मामले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। हालांकि, सॉफ्टवेयर में कमजोरी मिलने और मौजूदा हमले के बीच संबंध की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

रिटेल कंपनियों को करोड़ों यूरो के नुकसान की आशंका

हमले से पूरे खुदरा क्षेत्र को हुए कुल नुकसान का आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। फ्रांसीसी रिटेल कंपनी इंटरमार्शे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थिएरी कोटियार के मुताबिक, इस घटना से देशभर में एक ही दिन में कई करोड़ यूरो का नुकसान हो सकता है।

कंपनी ने बताया कि प्रभावित दुकानों को खराब हुए ताजा और फ्रोजन खाद्य उत्पादों को हटाना पड़ सकता है। इससे न केवल कारोबारियों को आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि खाद्य सामग्री की बर्बादी भी बढ़ सकती है।

एक अन्य रिटेल कंपनी कोऑपरेटिव यू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डोमिनिक शेल्शर ने बताया कि रविवार रात से ही कंपनी के रेफ्रिजरेशन सिस्टम में समस्याएं सामने आने लगी थीं। उन्होंने खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने वाली व्यवस्था को निशाना बनाए जाने पर गंभीर चिंता जताई।

यह घटना दिखाती है कि इंटरनेट से जुड़े उपकरणों की सुरक्षा में छोटी-सी कमजोरी भी बड़े कारोबारी नुकसान का कारण बन सकती है। अब जांच एजेंसियां हमले के तरीके, प्रभावित सिस्टम और जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में जुटी हैं।

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