महाकाल का दिव्य श्रृंगार: त्रिशूल-त्रिपुंड, भांग-चंदन और रजत आभूषणों से सजे बाबा, भस्म आरती में उमड़ी श्रद्धा

मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 04 अक्टूबर, रविवार को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर भस्म आरती संपन्न हुई। भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का त्रिशूल-त्रिपुंड, भांग, चंदन और रजत आभूषणों से दिव्य श्रृंगार किया गया। इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) //
पंचामृत से हुआ भगवान महाकाल का अभिषेक
मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक-पूजन किया गया।
अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का भांग, चंदन और आभूषणों से मनोहारी श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण के बाद हुआ दिव्य अलंकरण
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म अर्पित की गई।
इसके बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और रजत आभूषणों से भगवान का दिव्य अलंकरण किया गया।
भस्म आरती के बाद साकार स्वरूप में दर्शन की मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के चलते भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं कही। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गुंजायमान रहा।



