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06 जुलाई महाकाल भस्म आरती : चंद्र, त्रिपुंड और रजत आभूषणों से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार

पंचामृत अभिषेक के बाद हुई भस्म आरती, जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर

उज्जैन (शिखर दर्शन) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर सोमवार तड़के भगवान महाकाल की पारंपरिक भस्म आरती श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजन किया गया। इसके बाद भांग, चंदन, पुष्पों और रजत आभूषणों से भगवान का दिव्य श्रृंगार किया गया। मस्तक पर चंद्र और त्रिपुंड धारण कर बाबा महाकाल भक्तों को दिव्य स्वरूप में दर्शन दिए।

वैदिक मंत्रों के बीच हुआ अभिषेक और पूजन

मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक एवं दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। चंदन, भांग और सुगंधित पुष्पों से भगवान का अलंकरण किया गया।

भस्म अर्पण के बाद साकार स्वरूप में दिए दर्शन

भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाला, रुद्राक्ष की माला तथा पुष्पमालाएं पहनाकर भव्य श्रृंगार किया गया।

श्रद्धालुओं ने किए बाबा महाकाल के दर्शन

भस्म आरती में देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कही और बाबा महाकाल के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

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