03 जुलाई महाकाल भस्म आरती: दिव्य भस्म श्रृंगार में दिए बाबा महाकाल ने दर्शन, गूंजा जय महाकाल का उद्घोष

पंचामृत अभिषेक, भस्म आरती और अलौकिक श्रृंगार के साथ श्रद्धालुओं ने किए बाबा महाकाल के दर्शन, नंदी महाराज के कान में सुनाई मनोकामनाएं
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि शुक्रवार तड़के भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। प्रातः लगभग 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर विशेष पूजन किया गया। भांग, चंदन, सुगंधित पुष्पों और रजत आभूषणों से भगवान का दिव्य एवं मनोहारी श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को परंपरा के अनुसार वस्त्र से ढंककर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल का शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाओं तथा विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से भव्य श्रृंगार किया गया। गर्भगृह का वातावरण शिवभक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया।
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के उपरांत भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। शुक्रवार को भी सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
आरती के बाद श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कानों में अपनी मनोकामनाएं कही और भगवान महाकाल से सुख, समृद्धि एवं मंगलमय जीवन का आशीर्वाद मांगा। मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल”, “हर-हर महादेव” और “बाबा महाकाल की जय” के जयघोष से देर तक गुंजायमान रहा। भक्ति और आस्था के इस अद्भुत वातावरण में श्रद्धालु भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन कर भाव-विभोर नजर आए।



