25 जून महाकाल भस्म आरती: दिव्य श्रृंगार में भक्तों को दिए बाबा महाकाल ने दर्शन, जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

ज्येष्ठ शुक्ल दशमी पर विशेष पूजन-अर्चन
उज्जैन (शिखर दर्शन) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर बुधवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। प्रातःकालीन भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष एवं दिव्य श्रृंगार किया गया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और बाबा महाकाल के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
पंचामृत से हुआ अभिषेक
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। भांग, चंदन और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से विशेष पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।
भस्म रमाने के बाद हुआ भव्य अलंकरण
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्प अर्पित कर बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया।
निराकार से साकार स्वरूप में देते हैं दर्शन
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती का विशेष महत्व माना जाता है और प्रतिदिन देश-विदेश से श्रद्धालु इसके दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
नंदी महाराज के कान में सुनाई अपनी मनोकामनाएं
भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। मंदिर परिसर में पूरे समय “जय श्री महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे आध्यात्मिक वातावरण और भी भक्तिमय हो उठा।



