दुर्ग संभाग

हाईकोर्ट के आदेश पर चला बुलडोजर: रेलवे किनारे अवैध कब्जों पर निगम की बड़ी कार्रवाई, चार दुकानें जमींदोज

दुर्ग में अतिक्रमण हटाने पहुंचा प्रशासनिक अमला, अमलीडीह में भी अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर चला शिकंजा

दुर्ग ( शिखर दर्शन ) // शहर में अतिक्रमण के खिलाफ गुरुवार को प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाते हुए रेलवे लाइन से लगे बोरसी भाठा क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चला दिया। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में नगर निगम की टीम ने चार अवैध दुकानों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था और बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

तड़के शुरू हुई कार्रवाई, जेसीबी से हटाए गए अवैध निर्माण

सुबह नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। अंतिम नोटिस चस्पा करने के बाद जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के तहत पूरी की गई है।

अपील खारिज होने के बाद हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार रेलवे लाइन किनारे बने अतिक्रमणों को हटाने के आदेश पहले एसडीएम न्यायालय द्वारा दिए गए थे। प्रभावित पक्षों ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, लेकिन हाल ही में एसडीएम न्यायालय ने सभी अपीलों को खारिज कर दिया। इसके बाद नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को अमलीजामा पहनाया।

37 निर्माणों पर था आदेश, चार पर चला बुलडोजर

प्रशासन के मुताबिक हाईकोर्ट ने कुल 37 दुकानों और मकानों को हटाने के निर्देश दिए थे।

  • 33 प्रभावित पक्षों को न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे) मिल गया।
  • 4 निर्माण ऐसे थे जिनके पास कोई कानूनी राहत नहीं थी।
  • इन्हीं चार अवैध दुकानों को निगम ने ध्वस्त किया।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

मौके पर मौजूद रहे—

  • अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
  • नगर निगम आयुक्त
  • एसडीएम कार्यालय के अधिकारी
  • तहसीलदार
  • बड़ी संख्या में पुलिस जवान

प्रशासन ने पूरे अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया।

अमलीडीह में अवैध प्लॉटिंग पर भी कार्रवाई

इधर पाटन तहसील के ग्राम अमलीडीह में भी प्रशासन ने अवैध भूमि विकास के खिलाफ सख्त कदम उठाए। जांच में सामने आया कि स्वीकृत नक्शे के विपरीत जमीन को छोटे-छोटे प्लॉटों में विभाजित कर बिना अनुमति सड़क, बाउंड्रीवाल और अन्य निर्माण कार्य किए गए थे।

अधिकारियों के अनुसार इससे भूमि का मूल स्वरूप प्रभावित हुआ था और नियमानुसार विकास कार्य नहीं किए गए थे।

नोटिस के बाद भी नहीं मिला जवाब

छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माणों को हटाया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि संबंधित कंपनी को पहले नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

अतिक्रमण के खिलाफ आगे भी जारी रहेगा अभियान

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रेलवे भूमि, सार्वजनिक संपत्तियों और शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन मामलों में न्यायालय से कोई राहत प्राप्त नहीं हुई है, वहां भविष्य में भी इसी प्रकार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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