बिलासपुर संभाग

हाउसिंग सोसायटियों में हंगामा: ‘हैंडओवर नहीं, अधिकार नहीं’, बिल्डर्स पर नियंत्रण बनाए रखने का आरोप

आवासीय सहकारी समिति मंच ने प्रेसवार्ता में उठाए गंभीर सवाल, नए उपविधियों को तत्काल लागू करने की मांग

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // शहर की आवासीय कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में रहने वाले हजारों परिवार आज भी अपने अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह आरोप पंजीकृत आवासीय सहकारी समिति मंच ने बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में लगाया। मंच के पदाधिकारियों ने बिल्डर्स, प्रशासन और सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आवासीय सहकारी समितियों को सशक्त बनाने तथा नए उपविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की।

RTI में सामने आईं कई अनियमितताएं

मंच के संयोजक सुजीत कुमार मित्रा, सह-संयोजक जी. वाय. फड़के, सदस्य पी.सी. दास, राजीव कुमार और अजय बाटवे ने कहा कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों और अभिलेखों के अध्ययन में कई विसंगतियां सामने आई हैं।

उनका दावा है कि शहर की अनेक कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स का संचालन निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं हो रहा है। रहवासियों को न तो उनके अधिकारों की पूरी जानकारी दी गई और न ही सहकारी समितियों की भूमिका तथा हैंडओवर प्रक्रिया के बारे में पर्याप्त जागरूक किया गया।

90 प्रतिशत से अधिक कॉलोनियों का नहीं हुआ विधिवत हैंडओवर

मंच ने दावा किया कि वर्ष 2006 से अब तक विकसित 90 प्रतिशत से अधिक आवासीय कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स का विधिवत हैंडओवर नहीं किया गया है।

संयोजक सुजीत कुमार मित्रा ने आरोप लगाया कि कई बिल्डर्स जमीन और फ्लैट बेचने के बाद भी परिसरों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों में प्रभाव और संपर्कों के कारण कई मामलों को वर्षों तक लंबित रखा जाता है, जिससे रहवासियों और समितियों को उनके वैधानिक अधिकार नहीं मिल पाते।

विकास कार्यों पर भी पड़ रहा असर

मंच के अनुसार हैंडओवर प्रक्रिया पूरी नहीं होने से रहवासी कई महत्वपूर्ण विकास कार्य नहीं करा पा रहे हैं।

  • मंदिर निर्माण की योजनाएं अटकी हुई हैं।
  • सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर सिस्टम) स्थापित नहीं हो पा रहे।
  • सामुदायिक भवन और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का विकास प्रभावित है।
  • समितियां स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं।

सहकारिता विभाग की भूमिका पर सवाल

प्रेसवार्ता में सहकारिता विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए। मंच का आरोप है कि रहवासियों की शिकायतों के बावजूद समस्याओं का प्रभावी समाधान नहीं हो रहा है।

पदाधिकारियों ने कहा कि कई मामलों में विभागीय स्तर पर बिल्डर्स के पक्ष में झुकाव दिखाई देता है, जिससे विवाद और अधिक जटिल होते जा रहे हैं। मंच ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की।

अधूरी सुविधाओं के बीच हैंडओवर की कोशिश

मंच के सदस्य अजय बाटवे ने आरोप लगाया कि कुछ बिल्डर्स फायर सेफ्टी, सुरक्षा मानकों और अन्य अनिवार्य व्यवस्थाओं को पूरा किए बिना ही कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स को सोसायटियों के हवाले करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में संबंधित बिल्डर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए तथा गंभीर अनियमितता पाए जाने पर कॉलोनाइजर लाइसेंस निरस्त करने जैसी कार्रवाई की जाए।

मेंटेनेंस शुल्क के बावजूद सुविधाओं का अभाव

मंच के सदस्य राजीव कुमार ने कहा कि अधिकांश रहवासी नियमित रूप से मेंटेनेंस शुल्क, यूजर चार्ज और अन्य करों का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

रहवासियों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उनमें शामिल हैं—

  • पेयजल आपूर्ति की समस्या
  • साफ-सफाई की अव्यवस्था
  • स्ट्रीट लाइट की कमी
  • सुरक्षा व्यवस्था में खामियां
  • सामुदायिक सुविधाओं का अभाव

नए उपविधियों को लागू करने की मांग

मंच ने राज्य सरकार द्वारा सहकारी समितियों के लिए बनाए गए नए उपविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग उठाई। पदाधिकारियों का कहना है कि यदि नए नियमों का सही तरीके से पालन कराया जाए तो आवासीय सहकारी समितियां अधिक सक्षम, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

प्रेसवार्ता के दौरान मंच ने स्पष्ट कहा कि यदि आवासीय सोसायटियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं किया गया तो शहर के विभिन्न आवासीय परिसरों में रहने वाले लोग व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे। मंच ने प्रशासन से रहवासियों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की मांग की।

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