27 मई महाकाल भस्म आरती: रजत मुकुट और मस्तक पर त्रिशूल से अद्भुत श्रृंगार, यहां कीजिए दर्शन

बाबा महाकाल के जयकारों से गुंजायमान हुआ मंदिर परिसर
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि बुधवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। बाबा महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई। इस दौरान भगवान महाकाल का दिव्य और मनमोहक श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक पूजन किया गया। भांग, चंदन, सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से बाबा का अलौकिक श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया तथा मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर विधि-विधान से भस्म रमाई गई। इसके बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। मस्तक पर त्रिशूल का आकर्षक श्रृंगार भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र रहा।
प्रातःकालीन भस्म आरती में देशभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर आशीर्वाद मांगा। मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से देर तक गुंजायमान होता रहा।


