रायपुर संभाग

धर्मांतरण विधेयक के विरोध में अमित जोगी का प्रदर्शन, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, प्रति जलाकर जताई आपत्ति

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने गुरुवार को लोक भवन पहुंचकर राज्य में प्रस्तावित धर्मांतरण कानून के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। उन्होंने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इस विधेयक को वापस लेने की मांग की और विरोध स्वरूप इसकी प्रति जलाकर नाराजगी जताई।

अमित जोगी ने कहा कि प्रस्तावित कानून लोगों की आस्था पर सीधा प्रहार है और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। उनका कहना था कि विधानसभा सत्र पिछले एक महीने से जारी है, ऐसे में यदि सरकार को यह विधेयक लाना ही था तो इसे सत्र की शुरुआत में पेश किया जाना चाहिए था, ताकि विधायकों को अध्ययन और विस्तृत चर्चा का पर्याप्त समय मिल सके। सत्र के अंतिम दिन इसे लाना सरकार की घबराहट और डर को दर्शाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून विशेष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के अधिकारों का हनन करता है। जोगी के अनुसार, यह केवल धर्मांतरण को नियंत्रित करने का प्रयास नहीं, बल्कि लोगों की आस्था पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि विधेयक में “प्रलोभन” की परिभाषा को अत्यधिक व्यापक बना दिया गया है, जिसमें सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी शामिल कर लिया गया है।

अमित जोगी ने आगे कहा कि प्रस्तावित कानून में धार्मिक प्रचार को अपराध की श्रेणी में रखा गया है और कलेक्टर को धर्म से जुड़े मामलों का “द्वारपाल” बना दिया गया है। अब किसी भी व्यक्ति को अपने धार्मिक कार्यों के लिए प्रशासनिक अनुमति लेनी पड़ेगी, जो संविधान के मूल अधिकारों के विपरीत है।

उन्होंने यह भी बताया कि देश के कई राज्यों में इस तरह के कानून पहले ही लागू किए जा चुके हैं और इस मुद्दे पर Supreme Court of India में मामले लंबित हैं। ऐसे में विष्णु देव साय सरकार द्वारा जल्दबाजी में यह विधेयक लाना समझ से परे है।

अंत में अमित जोगी ने राज्यपाल से अपील की कि वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजें और इसके लागू होने पर रोक लगाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह कानून लागू हुआ तो इसके राजनीतिक परिणाम सत्तारूढ़ दल को सड़क, सदन, न्यायालय और आगामी चुनावों में भुगतने पड़ सकते हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!