छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी पप्पू बंसल EOW की हिरासत में, जल्द हो सकती है गिरफ्तारी
रायपुर (शिखर दर्शन) //
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले शराब कारोबारी पप्पू बंसल को हिरासत में लिया है।
सूत्रों के अनुसार, पप्पू बंसल से लंबी पूछताछ जारी है और EOW ने उन्हें पहले से रिमांड पर चल रहे आरोपी व्यापारी विजय भाटिया के आमने-सामने बैठाकर पूछताछ शुरू की है। जांच एजेंसी को संदेह है कि घोटाले से जुड़े पैसों की हेराफेरी, निवेश और मनी ट्रेल को लेकर महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
पप्पू बंसल की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है। यह कार्रवाई ईडी और EOW द्वारा लगातार घोटाले की परतें खोलने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों का हिस्सा है।
क्या है शराब घोटाला ?
शराब घोटाले का खुलासा तब हुआ जब आयकर विभाग ने 11 मई 2022 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार के माध्यम से बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी, अवैध वसूली और दलाली का नेटवर्क संचालित हो रहा है। इसमें रायपुर के पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर, तत्कालीन IAS अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और तत्कालीन मुख्यमंत्री सचिवालय की उपसचिव सौम्या चौरसिया की भूमिका का उल्लेख किया गया।
इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 नवंबर 2022 को पीएमएलए एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। जांच के दौरान सामने आया कि 2017 में आबकारी नीति में बदलाव कर CSMCL के जरिये शराब बिक्री का प्रावधान किया गया। इसके बाद 2019 में अनवर ढेबर ने अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का एमडी बनवाकर एक आपराधिक सिंडिकेट के माध्यम से पूरे प्रदेश में अवैध वसूली और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया।
2161 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
ED की चार्जशीट के अनुसार, अनवर ढेबर और उनके नेटवर्क ने शराब कारोबार में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के जरिये 2161 करोड़ रुपये का घोटाला किया। इस मामले में अब तक 21 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, और कई शराब कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
28 दिसंबर को ED ने कवासी लखमा के आवास पर छापा मारा था और 15 जनवरी को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ 3773 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई, जिसमें उन्हें सिंडिकेट का प्रमुख बताया गया है।
घोटाले की व्यापकता को देखते हुए जांच एजेंसियां लगातार छापेमारी, पूछताछ और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं। पप्पू बंसल की हिरासत इस पूरे मामले की जांच में एक अहम कड़ी मानी जा रही है, जिससे घोटाले की कई और परतें उजागर होने की संभावना है।
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