VSK ऐप पर बवाल: ऑनलाइन हाजिरी को वेतन का आधार बनाने के आदेश से भड़के शिक्षक, प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

डीपीआई के नए निर्देशों का शिक्षक संगठनों ने किया विरोध, तकनीकी खामियां दूर होने तक उपस्थिति पंजी को ही मान्य रखने की मांग
रायपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ में सरकारी शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) द्वारा जारी उस आदेश का शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है, जिसमें वीएसके ऐप के माध्यम से दर्ज उपस्थिति को ही वेतन भुगतान का आधार बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने इसे अव्यावहारिक और शिक्षकों के हितों के खिलाफ बताते हुए आदेश वापस नहीं लेने पर प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है।
फेडरेशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बसंत कौशिक सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक डिजिटल व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसी तकनीकी प्रणाली को अनिवार्य बनाना उचित नहीं है, जो स्वयं अभी पूरी तरह सक्षम और त्रुटिरहित नहीं है। उनका कहना है कि तकनीकी कमियों का खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ेगा, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
सर्वर क्रैश और नेटवर्क समस्या बनी सबसे बड़ी चुनौती
शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रदेश के लगभग 52 हजार विद्यालयों के करीब ढाई लाख शिक्षक एक ही समय पर ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास करते हैं, जिससे सर्वर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और वह बार-बार ठप हो जाता है। कई शिक्षकों को “सर्वर एरर 500” और “लॉगिन फेल” जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण समय पर विद्यालय पहुंचने के बावजूद उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती।
दूरस्थ और आदिवासी अंचलों—विशेषकर बस्तर, सरगुजा और जशपुर—में मोबाइल नेटवर्क की कमजोर स्थिति भी बड़ी बाधा बनी हुई है। कई स्थानों पर ऐप गलत लोकेशन दर्शाता है या जीपीएस ठीक से कार्य नहीं करता, जिससे शिक्षक अनुपस्थित दर्ज हो जाते हैं। पुराने मोबाइल फोन में ऐप के बार-बार हैंग होने और डेटा सिंक नहीं होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
उपस्थिति पंजी को ही बनाया जाए वेतन का आधार
शिक्षक संगठनों ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय में विधिवत भौतिक उपस्थिति पंजी संधारित किया जाता है, जिस पर संस्था प्रमुख के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे प्रमाणिक दस्तावेज को दरकिनार कर केवल तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण ऐप के आधार पर वेतन रोकना या कटौती करना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
संगठन का कहना है कि शिक्षक प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर विद्यालय पहुंचते हैं और अध्यापन के साथ-साथ मध्यान्ह भोजन, छात्रवृत्ति, परीक्षा, सर्वेक्षण तथा अन्य शासकीय जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करते हैं। ऐसे में तकनीकी विफलताओं के कारण वेतन प्रभावित करना शिक्षकों और उनके परिवारों के साथ अन्याय होगा।
आदेश वापस लेने और उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने राज्य सरकार से मांग की है कि डीपीआई के विवादित निर्देशों को तत्काल स्थगित किया जाए। जब तक वीएसके ऐप की सभी तकनीकी खामियां पूरी तरह दूर नहीं हो जातीं, तब तक विद्यालयों के भौतिक उपस्थिति पंजी को ही वेतन भुगतान का वैध आधार माना जाए।
संगठन ने यह भी मांग की है कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए शिक्षक प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, ताकि व्यवहारिक सुझावों के आधार पर ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सके, जिससे शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।



