29 जुलाई महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड, सूर्य और चंद्र अलंकरण से सजे बाबा महाकाल, भक्तों ने किए दिव्य दर्शन

पूर्णिमा पर विशेष भस्म आरती में उमड़ी आस्था, पंचामृत अभिषेक के बाद दिव्य स्वरूप में हुए महाकाल के दर्शन
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर बुधवार तड़के भगवान महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। प्रातः 4 बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के बीच भगवान महाकाल का विशेष पूजन-अर्चन किया गया। इस अवसर पर बाबा महाकाल का त्रिपुंड, सूर्य और चंद्र अलंकरण से मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए देशभर से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न कराया गया। भांग, चंदन, सुगंधित पुष्पों और आकर्षक आभूषणों से भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया।

भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रों के साथ भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के उपरांत ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा विविध पुष्पमालाओं से अलंकृत किया गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया।
भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं और परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की प्रार्थना की। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे और भक्तिमय वातावरण ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया।



