27 जुलाई महाकाल भस्म आरती: शिव परिवार के साथ दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

जल, पंचामृत और भस्म से हुआ अलौकिक अभिषेक, रजत मुकुट, रुद्राक्ष और पुष्पों से हुआ मनोहारी श्रृंगार; जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सोमवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। प्रातः मंदिर के कपाट खुलते ही गर्भगृह में पूजन-अर्चन का क्रम प्रारंभ हुआ और भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर पंचामृत से विशेष अभिषेक किया गया।
भस्म आरती से पहले हुआ विशेष अभिषेक एवं श्रृंगार
मंदिर के पुजारियों ने सर्वप्रथम गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। भांग, चंदन तथा सुगंधित द्रव्यों से पूजन के उपरांत बाबा का दिव्य श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण के बाद साकार रूप में हुए दर्शन

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा विभिन्न पुष्पमालाओं से अलंकृत किया गया। शिव परिवार के साथ सजे बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
भक्तों ने किए पुण्यदायी दर्शन
मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। अल सुबह आयोजित भस्म आरती में देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर सुख-समृद्धि और मंगल जीवन की प्रार्थना की।
‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर
भस्म आरती के दौरान पूरा श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयघोषों से गुंजायमान रहा। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत वातावरण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति का एहसास कराया।



