अटैचमेंट आदेश से इग्नाइट स्कूल में शिक्षकों की कमी का संकट

तीन शिक्षिकाओं की वापसी के आदेश से 95 विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका, अभिभावकों ने जताई चिंता
बलौदाबाजार ( शिखर दर्शन ) // शासकीय कार्यालयों में वर्षों से अटैच शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजने के राज्य शासन के आदेश का असर अब स्कूलों में भी दिखाई देने लगा है। बलौदाबाजार के नवीन इग्नाइट इंग्लिश मीडियम स्कूल से तीन शिक्षिकाओं की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यहां अध्ययनरत 95 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस निर्णय से अभिभावकों में गहरी चिंता व्याप्त है, क्योंकि स्कूल में अभी तक नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है।

कार्यालयों के लिए जारी आदेश का असर स्कूलों तक
शासन का उद्देश्य शासकीय कार्यालयों में अटैच शिक्षकों को वापस उनके मूल विद्यालयों में भेजना है, ताकि शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों को राहत मिल सके। लेकिन बलौदाबाजार जिले में इसका असर उन शिक्षकों पर भी पड़ रहा है, जो किसी कार्यालय में नहीं बल्कि दूसरे विद्यालयों में व्यवस्था के तहत शिक्षण कार्य कर रहे थे। इसी क्रम में इग्नाइट इंग्लिश मीडियम स्कूल की तीन शिक्षिकाओं को भी उनके मूल विद्यालय भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
नियमित नियुक्ति नहीं होने से बढ़ी परेशानी
नवीन इग्नाइट इंग्लिश मीडियम स्कूल में अब तक स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। विद्यालय का संचालन दूसरे स्कूलों से व्यवस्था के आधार पर भेजे गए शिक्षकों के सहारे किया जा रहा था। ऐसे में तीन शिक्षिकाओं के वापस जाने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। अभिभावकों का कहना है कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो बच्चों की पढ़ाई बाधित होगी और इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ेगा।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की बढ़ी चिंता
विद्यालय में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनके अभिभावकों ने बेहतर अंग्रेजी माध्यम शिक्षा की उम्मीद के साथ अपने बच्चों का प्रवेश कराया है। इनमें अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े हैं। पालकों का कहना है कि सरकार को शिक्षकों की वापसी से पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी, ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।
शिक्षा विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क किए जाने पर उन्होंने फिलहाल कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं अभिभावकों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र समाधान निकालेगा, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के जारी रह सके।




