स्कूलों में मंत्रोच्चार पर हाईकोर्ट की मुहर

याचिका खारिज, किसी छात्र को बाध्य नहीं किया जाएगा; फैसले का सीएम साय ने किया स्वागत
रायपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मंत्रोच्चार और प्रार्थना संबंधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र को मंत्रोच्चार के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। इस निर्णय का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों, राष्ट्रभावना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के संवर्धन की दिशा में राज्य सरकार के प्रयासों को मजबूती प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण, कर्तव्यबोध और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। विद्यालयों में प्रार्थना इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास करना और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को सशक्त बनाना है।
शिक्षा मंत्री बोले- संस्कारयुक्त शिक्षा को मिला कानूनी बल
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार की उस सोच की पुष्टि करता है, जिसके तहत शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्य, सकारात्मक सोच, राष्ट्रभावना और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ मूल्यपरक शिक्षा को भी समान महत्व दे रही है। विद्यालयों में प्रार्थना और मंत्रोच्चार का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और संस्कारों का विकास करना है। मंत्री ने कहा कि न्यायालय के इस निर्णय से राज्य सरकार की पहल को कानूनी मजबूती मिली है और विद्यालयों में संस्कारयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों को नया बल मिलेगा।
कोर्ट ने क्या कहा ?
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि फिलहाल किसी भी स्कूल में मंत्रोच्चार नहीं कराया जा रहा है। यदि भविष्य में इसकी शुरुआत होती है तो केवल इच्छुक विद्यार्थी ही इसमें भाग लेंगे और किसी भी छात्र को मंत्रोच्चार के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
सरकार के इस पक्ष को रिकॉर्ड पर लेते हुए न्यायालय ने कहा कि यदि भविष्य में किसी छात्र पर मंत्रोच्चार के लिए दबाव बनाया जाता है तो संबंधित पक्ष पर्याप्त साक्ष्यों के साथ पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। इसके बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
क्या था पूरा मामला ?
राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में मंत्रोच्चार प्रारंभ करने संबंधी पत्र जारी किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलीम रिजवी एवं अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह आदेश संविधान की भावना के विपरीत है तथा किसी एक धर्म विशेष की परंपरा को बढ़ावा देता है। उन्होंने आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।
गुरुवार को जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ में हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यार्थी को मंत्रोच्चार के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को भविष्य में किसी प्रकार के दबाव की स्थिति उत्पन्न होने पर साक्ष्यों के साथ नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की।



