02 जुलाई महाकाल भस्म आरती: भक्ति, श्रद्धा और दिव्यता का संगम, अलौकिक श्रृंगार में भक्तों को दिए बाबा महाकाल ने दर्शन

सुगंधित पुष्पों, रजत आभूषणों और भस्म श्रृंगार से सजा बाबा महाकाल का दिव्य दरबार, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि गुरुवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल की विश्वविख्यात भस्म आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर बाबा महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद भांग, चंदन, रजत आभूषणों, रुद्राक्ष की मालाओं और सुगंधित पुष्पों से भगवान का मनोहारी एवं दिव्य श्रृंगार किया गया। भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और विभिन्न पुष्पों से बाबा महाकाल का भव्य अलंकरण किया गया। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। प्रातःकालीन भस्म आरती में देशभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे और भक्तिमय वातावरण ने सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।




