मध्यप्रदेश

जलजमाव के बीच फैला करंट, 12 बकरों की मौत

प्री-मानसून बारिश ने नगर निगम के दावों की खोली कलई, कई इलाके बने तालाब, लोगों में आक्रोश

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // धर्मनगरी उज्जैन में हुई प्री-मानसून की पहली झमाझम बारिश ने जहां भीषण गर्मी से लोगों को राहत दी, वहीं नगर निगम और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल भी खोलकर रख दी। पहली ही बारिश में शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों में जलजमाव की स्थिति बन गई। सबसे दर्दनाक घटना केडी गेट चौराहे पर सामने आई, जहां पानी में करंट फैलने से करीब 12 बकरों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

शहर की प्रमुख सड़कें बनीं तालाब

शनिवार सुबह और दोपहर हुई तेज बारिश के बाद नई सड़क, कंठाल चौराहा, इंदौर गेट सहित कई व्यस्त इलाकों में पानी भर गया। सड़कों पर जलजमाव के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर यातायात भी प्रभावित रहा।

केडी गेट पर फैला करंट, 12 बेजुबानों की मौत

केडी गेट चौराहे पर जलभराव के बीच बिजली के पोल या खुले तारों के संपर्क में आने से पानी में करंट फैल गया। इसकी चपेट में आने से लगभग 12 बकरों की मौके पर ही मौत हो गई। राहत की बात यह रही कि कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। घटना ने शहर में विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सीवरेज कार्य बने लोगों की मुसीबत

शहर में चल रहे सीवरेज और ड्रेनेज प्रोजेक्ट भी बारिश के दौरान लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। कई क्षेत्रों में नाले, चेंबर और गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं। बारिश का पानी भर जाने से ये गड्ढे दिखाई नहीं दे रहे, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति कभी भी किसी बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।

नगर निगम और ठेकेदारों पर उठे सवाल

घटना के बाद नागरिकों ने नगर निगम, सीवरेज कंपनी और संबंधित ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। लोगों का आरोप है कि मानसून से पहले आवश्यक सुरक्षा और मरम्मत कार्य पूरे नहीं किए गए। खुले पड़े चेंबरों और अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर प्रशासन की लापरवाही सामने आई है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

स्थानीय निवासियों ने घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाएं नहीं सुधारी गईं तो आगामी मानसून में स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन से जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने, खुले चेंबर बंद कराने तथा विद्युत सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।

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