16 जून महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड-त्रिनेत्र से सजा बाबा का दिव्य स्वरूप, भक्तों ने किए अलौकिक दर्शन

पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती के बाद हुआ भव्य श्रृंगार, जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष द्वितीया के अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। प्रातः 4 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया और भगवान महाकाल का दिव्य एवं आकर्षक श्रृंगार किया गया।
पंचामृत से हुआ अभिषेक
मंदिर के कपाट खुलने के पश्चात पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया।
मंत्रोच्चार के बीच हुई भस्म आरती
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के बाद कपूर आरती की गई। इसके पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म रमाई गई। भस्म अर्पण के बाद भगवान को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला एवं पुष्पहार अर्पित किए गए।
त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजा दिव्य स्वरूप
भस्म आरती के उपरांत भगवान महाकाल के मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिनेत्र अंकित कर विशेष श्रृंगार किया गया। सुगंधित पुष्पों और आकर्षक आभूषणों से सुसज्जित बाबा महाकाल का स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
भक्तों ने मांगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं भी कही। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।
निराकार से साकार रूप में देते हैं दर्शन
धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होने उज्जैन पहुंचते हैं।



