हरिओम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर शव रोकने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की, दस्तावेज खंगाले

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // बिलासपुर के तोरवा स्थित हरिओम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में एक आदिवासी महिला के शव को भुगतान के अभाव में रोकने के आरोपों ने गुरुवार को पूरे शहर में हलचल मचा दी। मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने अस्पताल का घेराव किया और कलेक्टर तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कलेक्टर के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल पहुंची, उपचार से संबंधित दस्तावेजों की जांच की, मौके की वीडियोग्राफी कराई तथा महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, कोरिया जिले के ग्राम कामराजी निवासी जगन्नाथ प्रसाद ने 25 जुलाई को अपनी पत्नी तिलबसिया बाई (46 वर्ष) को उपचार के लिए हरिओम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि मरीज के परिजन उसे अस्पताल में छोड़कर चले गए थे और उनसे संपर्क नहीं हो सका। बाद में 29 जुलाई को अस्पताल ने पुलिस को महिला की मृत्यु की सूचना दी।
वहीं, मृतका के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बकाया राशि जमा नहीं होने तक शव देने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि आयुष्मान कार्ड प्रस्तुत करने के बावजूद 84,400 रुपये का बिल बनाया गया और आंशिक भुगतान के बाद भी शव नहीं सौंपा गया।
कांग्रेस ने खोला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलने पर क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना महंत ने कांग्रेस नेता विजय केशरवानी को मामले की जानकारी लेकर पीड़ित परिवार की सहायता करने के निर्देश दिए। इसके बाद विजय केशरवानी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अस्पताल पहुंचे और प्रबंधन से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल ने मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार करते हुए शव रोककर अमानवीय व्यवहार किया है।
बाद में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली की जांच तथा चिकित्सा के नाम पर हो रही कथित मनमानी पर रोक लगाने की मांग की।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर उपचार से जुड़े दस्तावेजों की जांच की और पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी कराई। अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निजी अस्पतालों पर उठे सवाल
हाल के दिनों में बिलासपुर के निजी अस्पतालों से जुड़े कई मामलों ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े किए हैं। हाल ही में एक निजी अस्पताल द्वारा कम समय के उपचार के बाद लाखों रुपये का बिल दिए जाने तथा एक अन्य नर्सिंग होम में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में सर्जिकल धागा छूट जाने का मामला भी सामने आया था। इन घटनाओं के बाद निजी अस्पतालों की जवाबदेही और उपचार की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो गई है।
नोट: इस मामले में शव रोकने और बिल वसूली से जुड़े आरोप परिजनों और कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए हैं। वहीं अस्पताल प्रबंधन का पक्ष अलग है। पूरे मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों द्वारा की जा रही है।



