उज्जैन में साध्वी हर्षानंद गिरि का बड़ा बयान: ‘महिलाओं के लिए कोई आश्रम पूरी तरह सुरक्षित नहीं’

गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन पहुंचीं साध्वी, आश्रमों में सुरक्षा, सोशल मीडिया और पार्लर जाने को लेकर खुलकर रखी अपनी बात
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन पहुंचीं मॉडल और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि ने आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं के लिए कोई भी आश्रम पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। उनका कहना है कि यदि कोई संत उन्हें बेटी मानकर जीवनभर सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का सार्वजनिक भरोसा देता है, तो वह उसी आश्रम में स्थायी रूप से रहने के लिए तैयार हैं।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने अपने गुरु महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि महाराज का आशीर्वाद लिया। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि सुरक्षा उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय है और जब तक सुरक्षित वातावरण का भरोसा नहीं मिलता, तब तक वह किसी आश्रम में स्थायी निवास नहीं करेंगी।
माता-पिता के साथ रहने पर भी दिया जवाब
संन्यास लेने के बाद भी माता-पिता के घर रहने और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि कुछ संत इस पर आपत्ति जताते हैं, लेकिन उनके पास बड़े-बड़े आश्रम हैं, जबकि उनके पास केवल दो ही स्थान हैं—गुरु का आश्रम और माता-पिता का घर। उन्होंने कहा कि जब तक उनका अपना सुरक्षित ठिकाना नहीं होगा, तब तक माता-पिता के साथ रहना ही उचित है।
पार्लर जाने को लेकर कही यह बात

पार्लर जाने को लेकर हो रही आलोचना पर साध्वी हर्षानंद गिरि ने कहा कि जो लोग इस पर सवाल उठाते हैं, उनमें से कई स्वयं आश्रमों में पार्लर की सेवाएं लेते हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसा नहीं करतीं, लेकिन उनका मानना है कि स्वच्छ और सुसज्जित रहना किसी भी आध्यात्मिक जीवन के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि माता लक्ष्मी और भगवान नारायण सौंदर्य तथा स्वच्छता के प्रतीक हैं, इसलिए उनके उपासक का व्यवस्थित और स्वच्छ रहना केवल सोच का विषय है।
पहले भी बयानों को लेकर रही हैं चर्चा में
गौरतलब है कि मॉडल और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षानंद गिरि इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं। प्रयागराज महाकुंभ के बाद संन्यास ग्रहण करने के पश्चात उन्होंने उज्जैन के लक्ष्मीपुरा क्षेत्र में सात दिवसीय देवी प्रवचन किए थे। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने कुछ संतों पर अपने प्रवचन का समय कम कराने और कार्यक्रम प्रभावित करने का आरोप भी लगाया था।



