IMA के इतिहास में नया अध्याय: महिला अधिकारियों का पहला बैच हुआ पास आउट, राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा- यह देश के लिए ऐतिहासिक क्षण

93 वर्षों में पहली बार परमानेंट कमीशन के लिए प्रशिक्षित महिला कैडेट्स बनीं सैन्य अधिकारी, राष्ट्रपति ने बढ़ाया उत्साह
देहरादून (शिखर दर्शन) // भारतीय सैन्य इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। 93 वर्षों के गौरवशाली इतिहास वाली इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से पहली बार परमानेंट कमीशन के लिए प्रशिक्षित महिला कैडेट्स का बैच पास आउट हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति एवं भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि यह केवल IMA ही नहीं, बल्कि देश की रक्षा व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
देहरादून स्थित IMA में आयोजित स्प्रिंग टर्म-2026 की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिला कैडेट्स की उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि नौ महिला कैडेट्स को परेड ग्राउंड पर देखकर उन्हें अत्यंत खुशी हुई। यह भारत में महिला नेतृत्व आधारित विकास की दिशा में बढ़ते कदमों का प्रेरणादायक उदाहरण है और आने वाले समय में अधिक से अधिक युवतियों को सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगा।
पहली बार महिला कैडेट्स ने पार किया ‘अंतिम पग’
IMA की स्थापना के 93 वर्ष बाद पहली बार महिला कैडेट्स ने प्रतिष्ठित ‘अंतिम पग’ (Antim Pag) पार कर सैन्य अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया। इस पहले बैच की नौ महिला कैडेट्स को उनके पुरुष साथियों के साथ लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्रदान किया जाएगा।
इन कैडेट्स ने चार वर्षों की कठोर सैन्य प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी की है, जिसमें तीन वर्ष का प्रारंभिक प्रशिक्षण पुणे के खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में शामिल रहा।
कुल 515 कैडेट्स बने अधिकारी
13 जून को आयोजित पासिंग आउट परेड में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स के कुल 515 जेंटलमैन एवं महिला कैडेट्स को भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्रदान किया गया। इनमें नौ महिला कैडेट्स के अलावा मित्र देशों के 29 कैडेट्स भी शामिल रहे।
मित्र देशों के कैडेट्स को भी दी शुभकामनाएं
राष्ट्रपति मुर्मू ने विदेशी कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि उनके देशों ने उन्हें उच्चस्तरीय सैन्य प्रशिक्षण के लिए भारत भेजा है और उन्हें विश्वास है कि ये अधिकारी अपने-अपने देशों की सेनाओं में उत्कृष्ट सेवाएं देकर भारत और अपने राष्ट्र का गौरव बढ़ाएंगे।
बदलती चुनौतियों के अनुरूप तैयार रहने की सलाह
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। नई तकनीक, आधुनिक युद्ध प्रणाली और जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय सेना को लगातार खुद को अपडेट रखना होगा।
उन्होंने नव नियुक्त अधिकारियों से जीवनभर सीखते रहने, कठिन परिस्थितियों में साहसिक निर्णय लेने और नैतिक मूल्यों के साथ नेतृत्व करने का आह्वान किया।
सैनिकों का विश्वास जीतना सबसे बड़ी जिम्मेदारी
राष्ट्रपति ने कहा कि एक सैन्य अधिकारी का दायित्व केवल आदेश देना नहीं, बल्कि अपने सैनिकों का मार्गदर्शन करना, उनकी देखभाल करना और उनके विश्वास को कायम रखना भी है। उन्होंने अधिकारियों से सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने और राष्ट्र सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
इस ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड के साथ भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी का एक नया दौर शुरू हुआ है, जिसे देश में महिला सशक्तिकरण और सैन्य क्षेत्र में समान अवसरों की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।



