राष्ट्रीय

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: खतरनाक और रेबीजग्रस्त कुत्तों को मारने तक की अनुमति, डॉग लवर्स की सभी याचिकाएं खारिज

सार्वजनिक स्थानों से हटाने के आदेश में बदलाव से इनकार

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // Supreme Court of India ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स और विभिन्न एनजीओ द्वारा दायर सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी पूर्व आदेश में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

बीमार और खतरनाक कुत्तों पर भी सख्ती

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है। कोर्ट ने राज्यों और प्रशासन को कानूनी दायरे में रहते हुए रेबीजग्रस्त और खतरनाक कुत्तों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि जरूरत पड़ने पर ऐसे कुत्तों को इंजेक्शन देकर euthanasia (दया मृत्यु) भी दी जा सकती है।

“बच्चों और बुजुर्गों पर हो रहे हमले नजरअंदाज नहीं कर सकते”

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि देशभर में बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों पर कुत्तों के हमले बढ़ रहे हैं। अदालत ने कहा कि वह इन “कठोर और चिंताजनक जमीनी हकीकतों” से आंखें नहीं मूंद सकती।

राज्यों को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फटकार लगाते हुए कहा कि 7 नवंबर 2025 को जारी आदेश का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेशों की अनदेखी को कोर्ट की अवमानना माना जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

पुराना आदेश रहेगा लागू

अदालत ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर में भेजा जाए और उन्हें दोबारा उसी स्थान पर न छोड़ा जाए।

17 नवंबर को मांगी कंप्लायंस रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए सभी राज्यों से अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। अदालत अब 17 नवंबर को यह देखेगी कि राज्यों ने आदेशों का कितना पालन किया और आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए।

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