वेदांता पावर प्लांट हादसा: भूपेश बघेल ने उठाए FIR की पारदर्शिता पर सवाल, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

20 मजदूरों की मौत के बाद जांच तेज, FIR किन धाराओं में दर्ज हुई—सरकार से जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
रायपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हादसे में दर्ज FIR को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि किन लोगों के खिलाफ किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और इसे सार्वजनिक भी किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जनता को पूरी जानकारी मिलने का अधिकार है और दोषियों पर बिना किसी दबाव के सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
इस हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है जबकि कई घायल अलग-अलग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच में प्रबंधन की गंभीर लापरवाही की बात सामने आ रही है।
प्रारंभिक तकनीकी जांच के अनुसार बॉयलर के फर्नेस में अत्यधिक ईंधन जमा होने से दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया, जिससे निचला पाइप अपनी जगह से हट गया और विस्फोट हो गया। फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट में भी अत्यधिक ईंधन संचय और दबाव को हादसे का प्रमुख कारण बताया गया है। साथ ही मशीनरी के रखरखाव और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही की बात भी सामने आई है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई है, जो तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए हैं और कहा है कि दोषियों पर श्रम कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से भी राहत राशि स्वीकृत की गई है।
कंपनी प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है, जबकि घायलों को 15-15 लाख रुपये सहायता राशि देने की बात कही गई है।



