MP में नारी शक्ति की गूंज: मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले- शासन में बहनों की भूमिका से बढ़ती है कार्यक्षमता

भोपाल के रवींद्र भवन में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’, टॉपर्स छात्राओं का हुआ सम्मान
भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश में 15 अप्रैल को नारी शक्ति के सशक्तिकरण पर केंद्रित भव्य आयोजन देखने को मिला, जहां राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिलाओं की भूमिका और सशक्त नेतृत्व पर जोर देते हुए कहा कि जब शासन के सूत्र बहनों के हाथ में आते हैं तो कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होता है।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की, जिसमें माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेंडरी परीक्षा में संयुक्त टॉपर भोपाल की खुशी राय-चांदनी विश्वकर्मा तथा हाई स्कूल परीक्षा में टॉप करने वाली पन्ना जिले की प्रतिभा सिंह सोलंकी को सम्मानित किया गया। सम्मेलन में महिलाओं के सशक्तिकरण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम और लोकतंत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं, जिनमें महिलाओं को सशक्त बनाने वाले कदम भी शामिल हैं। उन्होंने तीन तलाक कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम बहनों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश रानी दुर्गावती और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जैसी महान नारी शक्तियों की भूमि रही है, जिन्होंने सुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत किया।
कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य में नगरीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जबकि लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के प्रयास लोकतंत्र को और मजबूत करेंगे। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने की दिशा में यह विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम है।
राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने सम्मेलन को एक विचार यात्रा बताते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिला शक्ति को नई दिशा और अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का लंबा संघर्ष रहा है, जो वर्षों से विभिन्न चरणों में अटका रहा, लेकिन अब इसे लागू करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ चुके हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि इस अधिनियम से महिलाओं को न केवल नेतृत्व के अवसर मिलेंगे, बल्कि नीतिगत निर्णयों में भी उनकी भागीदारी बढ़ेगी। वहीं शिक्षाविद शोभा पेठणकर ने भारतीय संस्कृति में नारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नारी केवल परिवार का केंद्र ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की भी आधारशिला है। उन्होंने ऐतिहासिक नारी शक्तियों का उल्लेख करते हुए शिक्षा और सशक्त सोच की आवश्यकता पर बल दिया।



