दन-त्रिपुंड और रजत मुकुट से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजे जयकारे

पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का दिव्य अलंकरण, नंदी महाराज के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने मांगी मनोकामना पूर्ति की कामना
मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 12 अक्टूबर, सोमवार को तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान से संपन्न हुई। इस दौरान चंदन, भांग, त्रिपुंड, रजत मुकुट और सुगंधित पुष्पों से बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। भस्म आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर जय श्री महाकाल के जयकारे लगाए।
उज्जैन ( शिखर दर्शन ) //
सोमवार तड़के मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
चंदन, भांग और आभूषणों से दिव्य श्रृंगार
अभिषेक और पूजन के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। चंदन, भांग और विभिन्न आभूषणों से बाबा का अलंकरण किया गया। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। श्रृंगार के दौरान भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पमालाएं अर्पित की गईं।
भस्म अर्पण के बाद दिव्य स्वरूप में दर्शन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन का विशेष महत्व है। भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की।
नंदी महाराज के दर्शन कर मांगी मनोकामना पूर्ति की कामना
भस्म आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए। परंपरा के अनुसार, कई श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान के समीप अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कीं। मंदिर परिसर में बाबा महाकाल के जयकारे गूंजते रहे और भक्तिमय वातावरण बना रहा।



