CJP प्रदर्शन में पथराव, दो पुलिसकर्मी घायल; दिल्ली में 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने की खबर
आकाशवाणी भवन के पास बैरिकेडिंग तोड़ने और पुलिस पर पत्थर फेंकने का आरोप, जंतर-मंतर मार्च रोकने के लिए राजधानी में कड़ी सुरक्षा

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ गया। आकाशवाणी भवन के पास प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड्स गिराने और पुलिस पर पथराव किए जाने की खबर है। घटना में दो पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से करीब 500 लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट है।
आकाशवाणी भवन के पास पथराव, दो पुलिसकर्मी घायल
अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को इम्तियाज अली मार्ग पर आकाशवाणी भवन के पास उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब करीब 25 से 30 प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पार कर उन्हें गिरा दिया। आरोप है कि इस दौरान कुछ लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंके, जिससे दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।
घटना के बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की। पथराव की घटना के संबंध में पुलिस की जांच और आधिकारिक विवरण महत्वपूर्ण होंगे।
अलग-अलग इलाकों से करीब 500 लोगों को हिरासत में लेने की खबर
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान करीब 500 लोगों को हिरासत में लिया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद लोग राजधानी के अलग-अलग स्थानों पर जुटने और मार्च करने की कोशिश कर रहे थे।
कनॉट प्लेस में रीगल सिनेमा के पास समेत कई इलाकों से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ प्रदर्शनकारी शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के आसपास पहुंचकर नारेबाजी करते भी नजर आए।
बंगला साहिब गुरुद्वारे तक पहुंचे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग पुलिस से बचते हुए बंगला साहिब गुरुद्वारे में दाखिल हो गए। बताया गया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों का पीछा कर रही थी, जिसके बाद कुछ लोग गुरुद्वारे के भीतर चले गए।
प्रदर्शन में कुछ लोगों को कॉकरोच के एंटीना जैसे दिखने वाले हेलमेट पहने भी देखा गया। CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इस प्रदर्शन का आह्वान किया था।
सुरक्षा के लिए 40 हजार से अधिक जवानों की तैनाती का दावा
प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए दिल्ली में बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए गए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के 40 हजार से अधिक जवानों की तैनाती की गई थी। इनमें दिल्ली पुलिस के 15 हजार से अधिक कर्मियों और केंद्रीय बलों के करीब 26 हजार जवानों का उल्लेख किया गया है।
नई दिल्ली जिले को 20 जोन में बांटने और संभावित प्रवेश मार्गों पर 37 ब्लॉक पॉइंट बनाने की भी जानकारी सामने आई। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले रास्तों पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई और प्रमुख चौराहों पर निगरानी बढ़ाई गई।
मेट्रो स्टेशनों और मोबाइल इंटरनेट पर भी प्रतिबंध
प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए परिवहन और संचार सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली मेट्रो ने शुरुआत में 57 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद करने की घोषणा की थी, जबकि संशोधित सूची में 45 स्टेशनों का उल्लेख सामने आया।
इसके अलावा, जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के चार किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का आदेश जारी किए जाने की जानकारी दी गई। दिल्ली-गुरुग्राम मार्ग समेत कुछ प्रमुख रास्तों पर वाहनों की जांच और यातायात डायवर्जन भी किए गए।
दिल्ली पुलिस ने क्यों नहीं दी प्रदर्शन की अनुमति ?
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। पुलिस की ओर से आवेदन देर से दिए जाने और पिछले प्रदर्शनों में निर्धारित शर्तों के उल्लंघन का हवाला दिया गया। इसके साथ ही नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू होने की बात भी सामने आई।
पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थल तक पहुंचकर बड़ी सभा करने से रोकना और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया।
दूसरे राज्यों से भी पहुंचे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दूसरे राज्यों से भी लोगों के दिल्ली पहुंचने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारी पहले से ही राजधानी के होटलों और पेइंग गेस्ट आवासों में ठहरे हुए थे। इसी वजह से परिवहन सेवाओं पर पाबंदियों के बावजूद विभिन्न इलाकों में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी बनी रही।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों की कुल संख्या, उनके राज्यों से आने के विवरण और ट्रेनों को रद्द किए जाने के बीच संबंध की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं होती।



