
न्यायधानी में निजी अस्पतालों का काला सच ! कहीं शव पर सौदेबाजी , कहीं 18 घंटे के इलाज का लाखों का बिल , तो कहीं पेट में छूटा सर्जिकल धागा
72 घंटे में तीन बड़े विवादों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल, निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर उठी जवाबदेही की मांग
बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में बीते 72 घंटों के भीतर निजी अस्पतालों से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मामले में आदिवासी महिला के शव को भुगतान के अभाव में रोकने के आरोप लगे हैं, दूसरे में महज 18 घंटे के इलाज के बाद लाखों रुपये का बिल थमाने का विवाद सामने आया है, जबकि तीसरे मामले में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में सर्जिकल धागा छूटने की शिकायत ने मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं के बाद निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, बिलिंग व्यवस्था, चिकित्सा नैतिकता और प्रशासनिक निगरानी को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई है।

पहला मामला : शव पर सौदेबाजी के आरोप से मचा बवाल
तोरवा स्थित हरिओम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती आदिवासी महिला तिलबसिया की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। मृतका के परिजनों और कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बकाया राशि जमा नहीं होने तक शव सौंपने से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि इलाज के दौरान राशि जमा कराने के बावजूद अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई और शव लगभग दो दिनों तक अस्पताल में रखा गया।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, मजिस्ट्रियल जांच कराने तथा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल पहुंचकर दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है।
दूसरा मामला : 18 घंटे के इलाज के बाद लाखों का बिल
शहर के एलाइट हॉस्पिटल में भर्ती नगर निगम के कंप्यूटर ऑपरेटर संजय मिश्रा की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि करीब 18 घंटे के इलाज के बाद उन्हें 4.60 लाख रुपये का बिल थमा दिया गया। विरोध के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बिल घटाकर 2.25 लाख रुपये कर दिया।
परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि वास्तविक राशि कम थी तो पहले इतना अधिक बिल किस आधार पर बनाया गया। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज अत्यंत गंभीर अवस्था में भर्ती हुआ था और मानवीय आधार पर पूरी राशि नहीं ली गई।
तीसरा मामला : ऑपरेशन के बाद पेट में मिला सर्जिकल धागा
तोरवा स्थित पेंडलवार नर्सिंग होम भी गंभीर आरोपों के घेरे में है। शिकायत के अनुसार, सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला के पेट में सर्जिकल धागा छूट गया, जिससे उसे लगातार दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। बाद में दूसरे अस्पताल में जांच के दौरान पेट के भीतर धागा होने की पुष्टि हुई और दोबारा ऑपरेशन कर उसे बाहर निकाला गया।
शिकायत मिलने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. शुभा गरेवाल ने नर्सिंग होम को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में लापरवाही सिद्ध होती है तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
72 घंटे… तीन अस्पताल… तीन विवाद
- हरिओम मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में शव रोकने और अतिरिक्त राशि मांगने के आरोप।
- एलाइट हॉस्पिटल में 18 घंटे के इलाज के बाद लाखों रुपये के बिल को लेकर विवाद।
- पेंडलवार नर्सिंग होम में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में सर्जिकल धागा छूटने की शिकायत।
इन तीनों घटनाओं ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, उपचार की पारदर्शिता, मरीजों के अधिकार, बिलिंग व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बाद मरीजों और उनके परिजनों के बीच निजी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भरोसे का संकट गहराता दिखाई दे रहा है।




