अपोलो अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, निष्पक्ष पुनर्विवेचना की मांग

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // अपोलो अस्पताल में सामने आए कथित फर्जी डॉक्टर प्रकरण में अस्पताल प्रबंधन को कथित रूप से दी गई क्लीन चिट को लेकर कांग्रेस ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय पुनर्विवेचना कराने की मांग की।
नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच पर दिया जोर
विजय केशरवानी ने कहा कि इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल कथित फर्जी डॉक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे नियुक्त करने वाले अस्पताल प्रबंधन की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी भी चिकित्सक की नियुक्ति से पहले उसकी शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल पंजीयन, अनुभव तथा अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करना अस्पताल प्रबंधन की कानूनी एवं नैतिक जिम्मेदारी है। यदि इस प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह सकती।
उन्होंने बताया कि थाना सरकंडा में दर्ज अपराध क्रमांक 0563/2025 में कथित फर्जी डॉक्टर के साथ-साथ अपोलो अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध भी अपराध दर्ज किया गया था। ऐसे में यदि विवेचना के दौरान प्रबंधन को क्लीन चिट दी गई है तो यह कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कांग्रेस ने पूछा कि जब एफआईआर में प्रबंधन की भूमिका की जांच आवश्यक मानी गई थी, तो आखिर किन ठोस तथ्यों के आधार पर उसकी जवाबदेही समाप्त मान ली गई।
पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की उठाई मांग
कांग्रेस का कहना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में संस्थागत जवाबदेही का भी विषय है। विजय केशरवानी ने कहा कि प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ला सहित लगभग 27 लोगों की मृत्यु तथा सैकड़ों मरीजों के उपचार से जुड़े इस मामले में यदि संस्थागत स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं होती है तो पीड़ित परिवारों के साथ न्याय प्रभावित होगा और न्याय व्यवस्था पर आम लोगों का विश्वास भी कमजोर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने शुरू से इस मामले को प्रमुखता से उठाया है। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और “स्वास्थ्य न्याय यात्रा” जैसे आंदोलन चलाए गए। इन आंदोलनों का उद्देश्य केवल कथित फर्जी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई कराना नहीं, बल्कि नियुक्ति करने वाले अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराना था।
कार्रवाई नहीं होने पर जनआंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने मांग की है कि अपोलो अस्पताल प्रबंधन को दी गई कथित क्लीन चिट पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए, प्रबंधन की भूमिका की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष पुनर्विवेचना कराई जाए, नियुक्ति प्रक्रिया तथा प्रस्तुत दस्तावेजों के सत्यापन की विस्तृत जांच कराई जाए तथा यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, गंभीर चूक अथवा आपराधिक संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए।
विजय केशरवानी ने कहा कि यह केवल 27 परिवारों का मामला नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के विश्वास से जुड़ा विषय है जो उपचार के लिए अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और यदि किसी प्रभावशाली संस्था की भूमिका जांच के दायरे में आती है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में निष्पक्ष एवं संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी पीड़ित परिवारों और आम जनता के साथ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संतोष गर्ग, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष (सरकंडा) हितेश देवांगन, दीपक कौशिक, फ़रीद ख़ान, मनोज यादव, अनिमेष रजक, हरीश यादव सहित कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।



