साइबर ठगी में अब पैसा लौटाना भी पुलिस की प्राथमिकता

आईजी राम गोपाल गर्ग का बड़ा संदेश— सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पीड़ित को उसकी रकम वापस दिलाना ही असली सफलता; बिलासपुर में 2.36 लाख रुपये लौटे, 60 मामले प्रक्रिया में

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // साइबर ठगी के बढ़ते मामलों में अब पुलिस की प्राथमिकता केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पीड़ितों को उनकी ठगी गई राशि जल्द से जल्द वापस दिलाना भी पुलिस की प्रमुख जिम्मेदारी होगी। इसी उद्देश्य से मंगलवार को बिलासपुर रेंज में साइबर ठगी के मामलों में मनी रेस्टोरेशन (Money Restoration) और ग्रीवांस रिड्रेसल (Grievance Redressal) प्रणाली पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में बिलासपुर रेंज के सभी साइबर थाना प्रभारियों और संबंधित अधिकारियों को पीड़ितों को त्वरित राहत दिलाने की कानूनी एवं तकनीकी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
‘पीड़ित को न्याय तभी, जब उसकी रकम भी लौटे’
कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह तथा मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल उपस्थित रहे। इस दौरान आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में केवल बैंक खाताधारकों या निचले स्तर के आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। पुलिस की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी, जब ठगी का शिकार व्यक्ति अपनी पूरी या अधिकतम संभव राशि वापस प्राप्त कर सके। उन्होंने सभी साइबर थाना प्रभारियों को पीड़ितों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
I4C के दो महत्वपूर्ण मॉड्यूल की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण में भारत सरकार के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के अंतर्गत संचालित नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग (NCRP) पोर्टल के दो महत्वपूर्ण मॉड्यूल—मनी रेस्टोरेशन और ग्रीवांस रिड्रेसल—पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।

अधिकारियों को बताया गया कि यदि साइबर ठगी की राशि किसी बैंक खाते में फ्रीज हो जाती है, तो बैंक और संबंधित एजेंसियों के समन्वय से कानूनी प्रक्रिया पूरी कर वह राशि पीड़ित के खाते में वापस कराई जा सकती है। वहीं, जांच के दौरान गलती से फ्रीज हुए निर्दोष नागरिकों या व्यापारियों के खातों को पोर्टल के माध्यम से डी-फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
बिलासपुर में 2.36 लाख रुपये वापस, 60 मामलों पर कार्रवाई जारी
प्रशिक्षण के दौरान बिलासपुर ACCU की उपलब्धियों की भी सराहना की गई। अधिकारियों ने बताया कि मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से अब तक साइबर ठगी के पीड़ितों को 2 लाख 36 हजार रुपये वापस दिलाए जा चुके हैं। इसके अलावा 60 अन्य मामलों में राशि लौटाने की प्रक्रिया जारी है। इस उपलब्धि पर आईजी राम गोपाल गर्ग और एसएसपी रजनेश सिंह ने ACCU प्रभारी गोपाल सतपती एवं उनकी टीम की प्रशंसा करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की।
मुंगेली मॉडल बना केस स्टडी

मुंगेली के एसएसपी भोजराम पटेल ने हाल ही में सफलतापूर्वक संपन्न किए गए एक मनी रेस्टोरेशन प्रकरण को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत करते हुए पूरी प्रक्रिया की जानकारी साझा की। प्रशिक्षण में अधिकारियों ने तकनीकी और कानूनी पहलुओं से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।
बैंक विशेषज्ञ ने बताई कानूनी प्रक्रिया

आईसीआईसीआई बैंक के विशेषज्ञ कमलेश वाल्दे ने बताया कि साइबर ठगी की राशि वापस कराने के लिए बैंकों को किन दस्तावेजों, न्यायालयीन आदेशों और औपचारिकताओं की आवश्यकता होती है। उन्होंने बैंक और पुलिस के बीच समन्वय की व्यावहारिक प्रक्रिया भी समझाई।
अपराधियों की संपत्ति भी होगी कुर्क
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि साइबर अपराधों में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ उनकी चल एवं अचल संपत्तियों का भी विस्तृत ब्यौरा तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर इन्हीं संपत्तियों के माध्यम से पीड़ितों को आर्थिक क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
थानों में मिलेगी त्वरित सहायता
वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्देश दिए कि साइबर ठगी का शिकार कोई भी व्यक्ति थाने पहुंचने पर उसे साइबर सेल और थाना के बीच भटकाया न जाए। शिकायत तत्काल दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की जाए, ताकि पीड़ितों को शीघ्र राहत मिल सके।
नागरिकों से अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि साइबर ठगी का शिकार होते ही बिना देरी 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत करने पर राशि फ्रीज होने की स्थिति में उसे वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।





